Sunday, December 18, 2016

झगड़ना भी हो ईश्वर से तो घबराहट नहीं होती...

Saturday, December 17, 2016

नहीं कोई है साथ तो क्या तन्हा ही चुपचाप चलो...


Friday, December 16, 2016

बनो ऐसे कि मंजिल को हो इन्तजार तुम्हारे पहुंचने का...



बनो ऐसे कि
मंजिल को हो इन्तजार
तुम्हारे पहुंचने का,
और अगर ऐसा न हो तो
रह जाए एक मलाल उसे
तुम्हारे न पहुंचने का...


बनो ऐसे कि
हर महफिल में छाए रौनक
एक तुम्हारे आने से,
छा जाये हर तरफ मातम
एक तुम्हारे जाने से...

बनो ऐसे कि
बहुत बड़ी हो जाएं
तुम्हारे आस पास की
छोटी - छोटी खुशियां भी,
सिमट कर न के बराबर
रह जाये अपनी ही नहीं
दूसरों के गमों की दुनिया भी...

बनो ऐसे कि
हर रिश्ता तुमसे
जगमगाता सा नजर आये,
दिलो जान से निभाने पर भी
अगर कोई जाए तो पछताये कि
यार बहुत बड़ी गलती कर आये...

बनो ऐसे कि
हर हुनर - हर फन में
एक मिसाल हो जाओ,
तो देर किस बात की है
जो बीता सो बीता
अब तो होश में 'विशाल' हो जाओ...


- विशाल चर्चित

Wednesday, December 07, 2016

जिससे उपजे उसे सिखाते...

क्यों करें हम पूजा
क्यों करें हम आराधना
क्यों करें हम इबादत,
हो जाती है 
स्वतः ही ये तो
जब हम करते हैं
कोई अच्छा कार्य,
निभाते हैं जब
अपनों के प्रति 
मानवता के प्रति
नैतिकता के प्रति
अधिकांश कर्तव्य...
ईश्वर होता है 
प्रसन्न स्वतः ही
जब हम होते हैं प्रसन्न 
किसी की सहायता करके,
किसी के चेहरे पर
मधुर मुस्कान भरके...
ऊपर बैठा वो
हो जाता है निश्चिंत
जब हम नहीं होने देते
किसी स्वार्थी - अन्यायी 
और मक्कार के 
मनसूबों को सफल,
बचा लेते हैं कमजोरों
और असहायों को
किसी षडयंत्र से...
वर्ना सुनता और 
मुस्कुराता रहता है वो
'तुम ज्ञानी - हम अज्ञानी
तुमको नमामि हे अंतर्यामी
मेरे मालिक - मेरे आका
मेरे परवर दिगार....'
जिससे उपजे उसे सिखाते
सूरज को दीया दिखलाते
मन मे कुछ होठों पे कुछ ले
अच्छा उसका मन बहलाते...

- विशाल चर्चित

Saturday, November 26, 2016

लो जी बीमारी का जड़ से हुआ सफाया...


आजादी से अब तक
बीमार रहा ये देश,
नस - नस में व्याप्त
जीवाणु - विषाणु और
न जाने क्या - क्या...
कभी जुकाम - कभी बुखार
कभी जुलाब - कभी सिर दर्द
कभी फोड़े - कभी फुंसी
हमेशा कुछ न कुछ लगा रहना...
आते रहे तमाम हकीम - वैद्य
खिलाते रहे मीठे - मीठे टैबलेट
पिलाते रहे एक से एक टॉनिक,
मरीज भी खुश - हकीम भी खुश
और जीवाणु - विषाणु भी खुश...
पर बीमारी जहां की तहां
बनी रही जस की तस,
बढ़ती रही - फैलती रही
पूरे शरीर को खोखला करती रही...
अब सभी दवायें हुईं बेअसर
बीमारी हो गयी लाइलाज
तब रास्ता था बस एक
ऑपरेशन-सर्जरी-शल्य चिकित्सा...
लेकिन खतरा मोल कौन ले
सबका गुस्सा झेल कौन ले
हार दिखाई देती जिसमें
ऐसी बाजी खेल कौन ले...
ऐसे में एक फकीर आया
बार - बार जिसने चौंकाया
नहीं हुआ था जो भी अब तक
लो जी उसने कर दिखलाया...
पुराना खून बहाया
नया खून चढ़ाया,
इससे बीमारी का हुआ
पूरी तरह सफाया...
माना कुछ मुश्किल हो रही
माना कुछ तकलीफ हो रही
माना थोड़ा दर्द हो रहा,
लेकिन इसके बिना दोस्तों
होता है बदलाव कहां....
अगर ये मुश्किल झेल जाओगे
कल तुम पक्का मुस्कुराओगे,
चुस्त - दुरुस्त - सेहतमंद बनकर
अपना परचम लहराओगे...
इसी बात पर जोर से बोलो
दिल अपना पूरा खोलो -
"डॉ. मोदी जिन्दाबाद
सारा देश तुम्हारे साथ...."

- विशाल चर्चित

Wednesday, November 09, 2016

खूब सुनाई देता है कई बार मौन भी...


खूब सुनाई देता है
कई बार मौन भी,
गजब का समझ आता है
कई बार अनकहा भी...
बहुत सुकून देती हैं
कई बार तमाम दूरियां भी,
बहुत कुछ दिखा देती हैं
बेवजह की मजबूरियां भी...
बहुत कुछ दे देता है
परायों का अपना होना भी,
बहुत कुछ सिखा देता है
अपनों का पराया होना भी...
इसीलिये तो कहते हैं
सब वक्त - वक्त की बात है,
कभी कोई बहुत दूर
तो कभी कोई साथ है...
कोई अपेक्षा न हो तो
कोई परेशानी न होगी,
किसी के यूं ही चले जाने से
तबाह जिन्दगानी न होगी...
कोई जहां तक चले
तुम वहां तक चलो,
हरदम उसके लिये
मुस्कुराहट बनो...
लेकिन ये ना समझना
वो हरदम रहेगा,
और सफर ये सुनहरा
मरते दम तक रहेगा...
यहां इस जहां में
न कुछ आखिरी है,
जो आया वो जायेगा
ये लाजिमी है...
जाना तो तुमको भी
एक दिन पड़ेगा,
सब यहीं छूट जाना भी
एक दिन पड़ेगा...
तो फिर क्यों उदासी
और मायूस होना,
किसी चीज के पीछे
पागल क्यों होना...
वैसे बुराई नहीं
इसमें कुछ भी,
मगर जो भी हो
वो तरीके से होना,
फकीरों की आदत में
ढलकर के देखो,
आ जायेगा तुमको
पागल भी होना....

- विशाल चर्चित

Tuesday, November 08, 2016

छोटे - छोटे पाप


होता है
कई लोगों को
ये भ्रम कि
उनके कर्म हैं
बड़े अच्छे,
हैं वे बड़े आस्तिक
करते हैं बहुत
पूजा - अर्चना,
इसलिये है और
रहेगा ईश्वर हमेशा
उनके ही साथ,
भूल जाते हैं
अपनी गलतियां
अपनों से -
अपने शुभचिंतकों से
बोले गये कड़वे बोल,
बोले गये तमाम झूठ,
दिखाई गयी होशियारी,
अपने फायदे के लिये
अपने स्वार्थ के लिये...
भूल जाते हैं
कि कोई देखे न देखे
कोई समझे न समझे
वो ऊपर बैठा ईश्वर
सब देख रहा है
सब समझ रहा है,
दर्ज कर रहा है
अपने बही खाते में,
ताकि कर सके हिसाब
कर सके उचित न्याय,
एकदम सटीक,
एकदम सही - सही,
सिद्धांत है वही
एकदम सीधा सादा,
कि जैसा बोया
वैसा काटो,
न उससे कम
न उससे ज्यादा...
न चलती है कोई पूजा
न कोई आराधना
न कोई मस्का
न कोई चापलूसी...
काम आता है
हमारा कर्म - हमारा व्यवहार
लोगों से हमारा रिश्ता
अपनों से हमारा
निःस्वार्थ प्यार...


जिसने समझा - उसने पाया
वही है हंसता - जिसने हंसाया...


- विशाल चर्चित

Monday, November 07, 2016

झूठ - फरेब - अदाकारी...


सवालों से वही घबराते हैं
जिनके दिल में होता है
एक डर - एक चोर
होता है एक फरेब,
बोले होते हैं तमाम झूठ
छिपाये होते हैं तमाम राज
की होती हैं अदाकारियां
लगाये होते है कई मुखौटे...
तभी हर सवाल पर
हो जाता है दिल धक से
आ जाता है कलेजा मुंह को
कि अब क्या जवाब दें
कैसे टालें इस बला को,
इसीलिये तन जाती हैं भौहें
आ जाता है गुस्सा...
लेकिन याद रहे -

झूठ - फरेब - अदाकारी
नहीं छिपती - नहीं टिकती,
महल कैसा भी हो इनपर
ढहता है जरूर इक दिन...

- विशाल चर्चित

Sunday, October 09, 2016

चीनी सालों होश में आओ....

चीनी सालों होश में आओ वर्ना होश में ला देंगे
तेरी माँ की माँ को भी हम नानी याद दिला देंगे

गया ज़माना बात-बात पर हमको आँख दिखाते थे
और हिन्दुस्तानी हम सीधे सादे चुपचाप रह जाते थे

अब तो आँख दिखा के देखो सीधे आँख फोड़ देंगे
अग्नि पृथ्वी सारी मिसाइलें बीजिंग तक घुसेड देंगे

छोडो अरुणांचल-सिक्किम पर घडी-घडी दावा करना
जब देखो अपने धन-बल का रोज़ - रोज़ हौवा करना

अच्छा होगा इज्ज़त से हिमालय के उस पार ही रहना
अच्छा होगा अपनी छोटी सी चार फुटी औकात में रहना

वर्ना यहीं से बैठे - बैठे हम खोपड़ी तुम्हारी खोल देंगे
तुम चीनियों को हम शरबत जैसा पानी में घोल देंगे

इतराते हो जिस दीवार पे मिनटों में ध्वस्त हो जायेगी
हिरोशिमा-नागासाकी से भी भयानक तबाही हो जायेगी

पूरी दुनिया में अब भारत की शान का परचम लहराता है
बाप तुम्हारा अमरीका भी अब यहाँ आके दम हिलाता है

ताकतवर होने पर भी हम छोटे देशों को नहीं डराते हैं
शांतिप्रियता और भाईचारे के लिए हम "चर्चित" कहलाते हैं

- विशाल चर्चित

Saturday, October 01, 2016

कुछ बातें आज के हालात पर.....

- मत भूलें कि हम हिंदू - मुस्लिम या भारतीय - पाकिस्तानी होने से पहले मनुष्य हैं। 

- मनुष्य का प्रथम धर्म है मानवता एवं नैतिकता, जो कि ये सिखाती है कि हिंसा (आतंकवाद) से किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। 

- हिंसा (आतंकवाद) किसी भी देश या समाज का धर्म नहीं हो सकता।

- हिंसा (आतंकवाद) से सुखमय - शांतिमय एवं समृद्धिमय जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

- हिंसा (आतंकवाद) से कोई भी लक्ष्य अपने पूर्ण रूप में हासिल हो सकता। 

- ये भी कटु सत्य है कि अपनी सुरक्षा में, स्वार्थ से उपजी हिंसा (आतंकवाद) को रोकने के लिये, अराजकता के उन्मूलन एवं व्यवस्था  कायम करने के लिये नपी-तुली एवं सटीक हिंसा 
भी आवश्यक है।

- अन्याय का समर्थन अन्याय है, आतंकवाद का समर्थन भी आतंकवाद ही है। 

- मानवीय रूप से, नैतिक रूप से गलत बातों - गलत व्यवहार का समर्थन करने वाला किसी भी देश - किसी भी समाज - किसी भी वर्ग का नहीं हो सकता। ऐसे लोगों को पहचानें और उनसे अपने आपको अलग और दूर रखें।

- आतंकवाद एक ऐसा व्यवहार है जिसमें तमाम निर्दोष लोगों की बलि चढ़ती है कुछ लोगों के स्वार्थ पूर्ति के लिये, इसलिये इसे किसी भी सभ्य समाज में सही नहीं माना जाता।

- आतंकवाद से किसी भी देश, धर्म या समाज का भला नहीं हो सकता इसलिये समस्याओं के समाधान के लिये, अपनी नाराजगी और असहमति व्यक्त करने के लिये दूसरे मार्ग अपनाये जाने चाहिये जो शांति और विकास में बाधक न हों।

नवरात्रि पर सभी के लिये सुख - शांति एवं समृद्धि की कामना सहित देश एवं समाज की सुरक्षा के लिये शहीद होने वाले सभी जवानों को हार्दिक नमन एवं श्रद्धांजलि !!!

................................ - विशाल चर्चित

Thursday, August 25, 2016

हे माखन के चोर तुम्हारा स्वागत है...



हे माखन के चोर तुम्हारा स्वागत है
हे राधा चितचोर तुम्हारा स्वागत है
आओ लाओ सतयुग त्रेता द्वापर तुम
ये कलियुग घनघोर तुम्हारा स्वागत है...

छेड़ो ऐसी बंसी की धुन जग झूमे
तुम बोलो जैसे वैसे ही जग घूमे
कर दो कुछ ऐसा कि प्रेम की पवन चले
हे मनमोहन आओ तुम्हारा स्वागत है...

फिर से मित्र सखाओं का तुम नारा दो
व्याप्त अनैतिकताओं को घाव करारा दो
दिखलाओ लीला ऐसी कि पाप मिटे
हे लीलाधर आओ तुम्हारा स्वागत है...

दो गीता का ज्ञान सभी को नई तरह से
खोलो अंतर्मन के द्वार सभी के नई तरह से
काम क्रोध मद मोह सभी की अति रोको
हे योगिराज - हे कृष्ण तुम्हारा स्वागत है
हे 'सबसे चर्चित मित्र' तुम्हारा स्वागत है...

सभी इष्टमित्रों के लिये जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामना सहित....


- विशाल चर्चित

Thursday, August 18, 2016

ये राखी के धागे........


क्या अजीब खेल हैं ज़िंदगी के
कि एक ही कोख से जन्म लेते हैं
वर्षों एक छत के नीचे साथ रहते हैं
लड़ते हैं - झगड़ते हैं - रूठते हैं - मनाते हैं
समझते हैं - समझाते हैं...
ढेर सारी चीजों पर -
ढेर सारी बातें करते हैं
हर सुख में - हर दुःख में
एक दूसरे का सहारा बनते हैं,
देखते ही देखते पता ही नहीं चलता
और आता है एक दिन ऐसा भी कि
न चाहते हुए भी बिछड़ जाते हैं हम...
बस रोते - बिलखते लाचार से
हाथ हिलाते रह जाते हैं हम...
अब तो सिर्फ आवाज सुनाई देती है
या वर्षों बाद मिलना हो पाता है...
इस बीच अकेले में हमें जोड़े रखता है
हमारा प्यार - हमारे बचपन की यादें
कुछ परम्पराएं - कुछ संस्कार
और इनकी खुशबू से भीगे धागे,
ये राखी के धागे........

- VISHAAL CHARCHCHIT

Monday, August 15, 2016

स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर....


स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर
आइये एक दूसरे को शुभकामना देते हुए
आइये शपथ लें कि -

अपने संविधान - तिरंगे, राष्ट्र गान और
सभी दिवंगत महापुरुषों का सम्मान करेंगे,
संविधान कि सभी धाराओं एवं नियमों का
ठीक से पालन हो इसका ध्यान रखेंगे,
अंग्रेजी लिखेंगे - पढेंगे - बोलेंगे लेकिन
मातृभाषा हिंदी का ह्रदय में
सबसे विशेष स्थान रखेंगे.......

विदेश - विदेशी तकनीक तथा
विदेशी संसाधनों का दोहन करेंगे पर
अपने देश - इसकी गरिमा का
सदैव आन - बान - शान रखेंगे.....

किसी बात पर असहमति या विरोध हो
तो धरना - प्रदर्शन - आन्दोलन करेंगे
लेकिन राष्ट्र की कोई अपूरणीय क्षति न हो
इस बात का सदैव ध्यान रखेंगे......

स्वयं की सुख - समृद्धि - उन्नति एवं
यश - कीर्ति में वृद्धि करते रहेंगे पर
सदा इससे जुड़ा हुआ अपने
राष्ट्र के विकास का अभियान रखेंगे....

सभी वर्गों, धर्मों और समाजों को
को जोड़ते हुए एकता - अखंडता और
भाईचारे को बढ़ावा देते हुए सबके चेहरों पर
अपनेपन की विशेष मुस्कान भरेंगे.......

और अगर अपने मरने से बहुतों का भला होता हो
तो हम सदैव बन्दूक की नोक पर अपनी जान रखेंगे.....

:::::::::: जय हिंद :::::::::::

.............................................- विशाल चर्चित

Monday, August 08, 2016

बचपना वचपना मस्तियां वस्तियां....


बचपना वचपना मस्तियां वस्तियां
भूल बैठे हैं हम तख्तियां वख्तियां

अब वो गेंदों से बचपन का रिश्ता नहीं
घूमते थे कभी बस्तियां बस्तियां

टीवी नेट की लतें लग गयीं इस कदर
अब लुभाती नहीं कश्तियां वश्तियां

खुदकुशी तक की नौबत पढ़ाई में है
क्या करेंगे मटरगश्तियां वश्तियां

ऐब बच्चों में तो चाहिये ही नहीं
बस बड़े ही करें गल्तियां वल्तियां

- विशाल चर्चित

Sunday, August 07, 2016

गर दोस्तों का साथ रहे जिन्दगी जिन्दाबाद रहे...


एकाएक हो जाती हैं
हमारी कई आंखें
हमारे कई हाथ,
बढ़ जाती है ताकत
बढ़ जाता है कई गुना
हमारा हौसला,
हो जाती है एकाएक
बहुत दूर तक हमारी
हमारी पहुंच,
इसतरह आसान हो जाते हैं
हमारे तमाम काम
और बहुत आसान सी
हो जाती है जिन्दगी हमारी,
जब हो जाते हैं
कुछ अच्छे दोस्त हमारे साथ...
हम न होकर भी हो जाते हैं
डॉक्टर-इंजीनियर-मैनेजर
वकील-पुलिस ऑफीसर
या फिर राजनीतिज्ञ,
क्योंकि हमारे दोस्त हैं न ये सब?!
कोई भी दिक्कत हो
कोई भी अड़चन हो,
बस दोस्त को फोन घुमाना है
कोई भी - कैसी भी समस्या हो
समाधान फटाफट हो जाना है...

गर दोस्तों का साथ रहे
जिन्दगी जिन्दाबाद रहे...

- विशाल चर्चित

Tuesday, July 26, 2016

सोनू यार मोनू यार बारिश कितनी अच्छी यार...

 
सोनू यार मोनू यार
बारिश कितनी अच्छी यार,
मम्मी बोली नहीं भीगना
छतरी कितनी छोटी यार...

चल कागज की नाव बनायें
पानी में उसको तैरायें,
तितली रानी को भी उसमें
बिठा के दोनों सैर करायें...

अरे देख तो वो है चींटा
चींटे पर चल मारें छींटा,
अच्छा बेचारे को छोड़
आ हम दोनों खायें पपीता...

वाह मस्त क्या हरियाली है
लगता जैसे खुशहाली है,
ठंडी-ठंडी हवा बह रही
दिल को खुश करने वाली है...

पापा कहते पढ़-पढ़-पढ़
होता जा रहा तू मनबढ़,
कीचड़-पानी में मत खेल
नये बहाने तू मत गढ़...

पापा को कैसे समझायें
हम बच्चे कैसे बंध जायें,
बारिश हो और हम ना भीगें
क्या हम भी पापा बन जाये?

- विशाल चर्चित

Sunday, July 24, 2016

बनो ऐसे कि मंजिल को हो इन्तजार तुम्हारे पहुंचने का...

 
बनो ऐसे कि
मंजिल को हो इन्तजार
तुम्हारे पहुंचने का,
और अगर ऐसा न हो तो
रह जाए एक मलाल उसे
तुम्हारे न पहुंचने का...

बनो ऐसे कि
हर महफिल में छाए रौनक
एक तुम्हारे आने से,
छा जाये हर तरफ मातम
एक तुम्हारे जाने से...

बनो ऐसे कि
बहुत बड़ी हो जाएं
तुम्हारे आस पास की
छोटी - छोटी खुशियां भी,
सिमट कर न के बराबर
रह जाये अपनी ही नहीं
दूसरों के गमों की दुनिया भी...

बनो ऐसे कि
हर रिश्ता तुमसे
जगमगाता सा नजर आये,
दिलो जान से निभाने पर भी
अगर कोई जाए तो पछताये कि
यार बहुत बड़ी गलती कर आये...

बनो ऐसे कि
हर हुनर - हर फन में
एक मिसाल हो जाओ,
तो देर किस बात की है
जो बीता सो बीता
अब तो होश में 'विशाल' हो जाओ...

- विशाल चर्चित

Saturday, July 23, 2016

तब मौन हो जाता है अत्यंत आवश्यक...



मौन हो जाता है
अत्यंत आवश्यक,
तब -
जब हो गया हो
बहुत अधिक
कहना या सुनना,
जब लगने लगे कि
अब नहीं चाहते लोग
आपकी सुनना...
जब नहीं चल रहा हो
किसी पर अपना बस,
प्रतिकूल परिस्थितियों
के कारण जब
नहीं रह जाये
जीवन में कोई रस...
जब व्यथित हो चला
हो आपका मन,
जब नीरसता से भरा
हो वातावरण...
तब हो जायें शांत
तब हो जायें स्थिर
तब हो जायें उदासीन
तब हो जाये मौन...
क्योंकि -
मौन आत्मचिन्तन है
मौन आत्ममंथन है
मौन है परिमार्जन हृदय का
मौन आत्मा का स्पंदन है...

- विशाल चर्चित

Sunday, June 26, 2016

ईश्वर देखो बस्ता लेकर...


सारे कहते बच्चे ईश्वर
ईश्वर देखो बस्ता लेकर,
जाने की तैयारी में है
विद्यालय मुस्कान है लेकर...
नन्हे-नन्हे हाथों में अब
नन्ही-नन्ही पुस्तक होगी,
नन्हे-नन्हे स्लेट चॉक से
प्यारी-प्यारी बातें होंगी...
कख एबीसीडी होगी
मां मां पापा दादा नाना,
आड़े टेढ़े नक्शे होंगे
और साथ में गाना वाना...
मानो सब मामूली बातें
मानो तो आध्यात्म है इसमें,
'चर्चित'को तो दिखता अक्सर
ईश्वर खुद साक्षात है इसमें...

- विशाल चर्चित

Tuesday, March 08, 2016

महिला दिवस पर जीवनसंगिनी - अर्धांगिनी की शान में एक रचना...

जीवनसंगिनी...
ये एक शब्द मात्र नहीं
बल्कि एक पूरा संसार है
खुशियों का - खुशबुओं का
एहसासों का - मिठासों का
रिश्तों का - नातों का....
जीवनसंगिनी...
एक संगी - एक साथी ही नहीं
बल्कि एक हिस्सा है
हर सुख - दुःख, हर धर्म - कर्म का
हर बात का - हर विचार का,
हर स्वभाव - हर व्यवहार का...
लेकिन ये सब तब है जबकि
हम इन सब चीज़ों को
मानें - महसूस करें,
ठीक उस तरह जैसे कि
हम एक मूर्ति को
मानें तो ईश्वर नहीं तो पत्थर...

- विशाल चर्चित

महिला दिवस पर एक खास रचना...

हे नारी तू सागर है...
हे नारी तू सागर है
जहां नदियाँ मिलतीं आकर हैं
पुरुष समझता आधा - पौना
कहे घरेलू गागर है...

जिसने भाँप लिया रत्नों को
तेरे आँचल के साए में,
सही अर्थ में समझो उसका
देवी - देवताओं का घर है...

फ़र्ज़ - धर्म और संस्कार
बचपन से साथ लिए चलती,
इन सीमाओं के बावजूद
उन्नति करती तू अक्सर है...

पुरुष उलझ जाता अक्सर
दुनियादारी के पचड़ों में,
पर तेरे लिए तो घर - परिवार
सारी दुनिया से बढ़कर है...

नौ माह तक अपने खून से
सींच-सींच देती आकार,
फिर सहती पीड़ा अथाह
तब आता बच्चा धरती पर है...

धन्य तेरी ये सहनशीलता
ऋणी तेरा संसार सकल,
हे नारी, तुझको "चर्चित" का
श्रद्धा से भरपूर नमन है...

- विशाल चर्चित

महिला दिवस पर...

Sunday, February 28, 2016

एक बच्चे की भावनाओं को शब्द...


इम्तहान खत्म पर
टेंशनें बनी हुई,
कुछ भी सूझता नहीं
कि क्या करूं 
क्या ना करूं,
पापा मम्मी चाहते
रात-ओ-दिन पढ़ूं-पढ़ूं
लेकिन मेरा मन करे
पेड़ों पर चढ़ूं-चढ़ूं,
दादा-दादी सबसे अच्छे
जो कि हरदम चाहते
मैं ये करूं या वो करूं
पर हमेशा उनको मैं
खुश ही खुश दिखूं-दिखूं !!!

- विशाल चर्चित

Wednesday, February 24, 2016

मानो तो मामूली सिक्का हो जाता है हजारों का...


जिधर देखो उधर
है दुख ही दुख,
जिसे देखो वही
है दुखी-है निराश,
क्योंकि उन्हें
नहीं आता सुखी होना,
उन्हें लगता है कि
गाड़ी-बंगला और
करोड़ों की कमाई को ही
कहते हैं सुखी होना...
लेकिन यदि ऐसा होता तो
नहीं दिखती मुस्कान कभी
किसी भी गरीब के चेहरे पर,
नहीं दिखते आंसू कभी
किसी अमीर के चेहरे पर...
लोग दुखी हैं क्योंकि
उनको चाहिये सब कुछ
अपनी ही पसंद का
अपने ही हिसाब से,
उससे कम पर तो
नहीं होना है कभी खुश
नहीं होना है कभी संतुष्ट...
सब कुछ छीन लेना है
सब कुछ झपट लेना है
सब कुछ हथिया लेना है,
ईश्वर-खुदा-गॉड या ऊपरवाला 
तो जैसे है सिर्फ 
आदेश सुनने के लिये ही,
ये आदेश होता है
पूजा के रूप में या
इबादत के रूप में
प्रार्थना के रूप में...
यदि हो गया अपने मन का
तो खुश कि देखा?
मैंने कर दिखाया न?!
मैं ये - मैं वो...
और जब नहीं होता
अपने मन का तब
शुरू होता है रोना
दूसरों की गलती पर
अपने भाग्य पर
या फिर ईश्वर पर...
लो सुनो एक उपाय
करके देखो एक प्रयोग
सुखी जीवन के लिये
शांतिमय हर पल के लिये
हमेशा मुस्कुराने के लिये...
सच में स्वीकार लो
ईश्वर की सत्ता को,
सीख लो स्वीकारना
अपनी हार को,
मान लो कि
तुम्हें कुछ नहीं है पता,
मान लो कि 
नहीं है कुछ भी 
तुम्हारे हाथ में और
छोड़ दो तर्क करना...
फिर करो महसूस
ईश्वर को-प्रकृति को
अपने भाग्य को
सुख को-सुकून को...

सार ये है कि -

सुख-दुःख है सब झूठी बातें
सारा खेल विचारों का,
मानो तो मामूली सिक्का
हो जाता है हजारों का...

- विशाल चर्चित

Sunday, February 14, 2016

प्यार अगर हो तो जैसे दिल-जिस्म का...


प्यार,
अगर हो तो
हो चौबीसों घंटे का
हो पूरे महीने का
हो पूरे साल का
हो जीवनभर का,
जैसे होता है
दिल और जिस्म का...
जिस्म रहता है 
हमेशा संभाले हुए दिल को
फूल की तरह,
और दिल
चलता रहता है
धड़कता रहता है
हमेशा-हमेशा
जिस्म के लिये...
रिश्ता खत्म
प्यार खत्म
तो समझो
खेल खत्म...

हैप्पी वैलेंटाइंस डे

- विशाल चर्चित