Monday, February 26, 2018

'श्री' बनकर ही फिर आना...


एक देवी सी प्रकट हुई तुम
आई - छाई - चली गयी,
और - और करते रहे लोग
मुस्काई पर चली गई...

सूरत - सीरत दोनों साथ
मिल पाती है कितनों को,
एक नाम में इतनी खूबी
मिल पाती है कितनों को...

चार वर्ष में सपने गढ़ना
हो पाता है कितनों से,
एक जीवन ही सौ जीवन सा
हो पाता है कितनों से...

रोम - रोम बोले - थिरके
ऐसा अभिनय और कहां,
बच्ची बूढ़ी सब बन सकती
ऐसा अभिनय और कहां...

जैसे तुम सोयी हो कल
नींद आती है कितनों को,
जैसे तुम आसानी से गई
मौत आती है कितनों को...

मौत वही जो चुपके से हो
नींद आयी और उठे नहीं,
या फिर चोट लगी थोड़ी सी
बेहोशी और उठे नहीं...

खैर तुम्हारा खास था सब
आना - जीना और जाना,
काश कि ऐसा और हो सके
'श्री' बनकर ही फिर आना...

- विशाल चर्चित

Friday, February 23, 2018

मैं भटका तो जग था स्थिर, मैं स्थिर जग भटक रहा है...


Wednesday, February 21, 2018

🙏 जय हो जय बजरंगी लाला 🙏


जय हो जय बजरंगी लाला
   खोल दो इस किस्मत का ताला
       ज़रा इधर भी खिसका दो
          कुछ करोड़ नोटों की माला,
             जय हो जय बजरंगी लाला...

ज़रा अपन भी चखें अमीरी
   गाडी - बँगला सैर विदेशी,
      रोज़ खाऊँ मैं खाना बढ़िया
         फाइव स्टार होटलों वाला,
           जय हो जय बजरंगी लाला...

नहीं चाहिए सत्ता - कुर्सी
   नहीं बनानी है सरकार,
      लेकिन जड़ से साफ़ कर सकूं
         भ्रष्टाचार और घोटाला,
            जय हो जय बजरंगी लाला...

चोरों की हो खाट खड़ी
   और मक्कारों का दीवाला,
     बजा सकूं मैं इनके सिर पर
       ज़रा गदा दो अपनावाला,
         जय हो जय बजरंगी लाला...

दीन - दुखी के काम आ सकूं
  हर चेहरे पे चमक ला सकूं,
    लेकर आऊँ रामराज मैं
       पावर दो भारी वाला,
          जय हो जय बजरंगी लाला...

- VISHAAL CHARCHCHIT

Tuesday, February 13, 2018

हे शिव-महेश्वर-शम्भु-शंकर तुम करो अब ताण्डव...


हे शिव-महेश्वर-शम्भु-शंकर
तुम करो अब ताण्डव,
पाप अपने चरम पर है
तुम करो अब ताण्डव,..

व्याप्त है चहुंओर भय
अतिक्रूरता-आतंकवाद,
पशु-पक्षि भी सहमे हुए
प्रभु करो अब ताण्डव,..

यम-नियम और धर्म पर
पाखंड भारी पड़ रहा,
सच के ऊपर झूठ और
छल-छंद का रंग चढ़ रहा,
तुम सृष्टि का परिमार्जन हो
इसलिये करो अब ताण्डव,..

नव-कल्पना, परिकल्पना
नव प्रकृति को आकार दो,
नव आत्मा - परमात्मा
नव धर्म - नव संसार दो,
नव शून्य - नूतन वायु-जल हो
इसलिये करो अब ताण्डव,..

दोष सब निर्दोष और
प्राचीन अर्वाचीन कर दो,
हर हृदय को शुद्ध निर्मल
एवं देवासीन कर दो,
हे रुद्र, हों सब सत्य
'चर्चित के वचन'
अतएव करो अब ताण्डव...

सभी इष्ट मित्रों के लिये
महाशिवरात्रि की
हार्दिक शुभकामना सहित

- विशाल चर्चित