Wednesday, February 15, 2017

हमारे बुजुर्ग...

Thursday, February 09, 2017

बड़ी गहरी आती है नींद जब पता हो कि कोई है...


बड़ी गहरी आती है नींद
जब पता हो कि कोई है
समय से जगा देने वाला,
बढ़ जाता है खाने का जायका
'आपको भूख लगी होगी'
जब कोई हो ये बता देने वाला...

अच्छा लगता है भूल जाना
तमाम चीजों का भी
जब कोई हो हमारी
हर चीज को याद रखनेवाला,
हो ही जाते हैं थोड़े से लापरवाह हम
जब कोई हो हमारी फिक्र करने वाला...

कई बार यूं ही
मन करता है लड़खड़ाने का
जब हो कोई संभाललेने वाला,
आ ही जाती है मुसीबतों पर भी हंसी
जब पता हो कि कोई है
हमें उनसे भी निकाल लेनेवाला...

बिना बात के भी आ जाता है रोना
जब कोई हो आंसू पोछनेवाला,
दिमाग हो जाता है शून्य सा
जब कोई हो हमसे भी ज्यादा
हमारे बारे में सोचनेवाला...

बदल जाते हैं जिन्दगी के मायने ही
जब कोई हो हमारे लिये ही
चुपचाप जिये जानेवाला,
थोड़ा तो गुरूर आ ही जाता है
जब कोई हो अपना सबकुछ
हम पर निसार किये जाने वाला...

- विशाल चर्चित

Friday, January 27, 2017

कितना सुन्दर मौसम - मौसम दिल ने छेड़ी सरगम-सरगम

कितना सुन्दर मौसम - मौसम
दिल ने छेड़ी सरगम-सरगम
आओ चिड़ियों झूमो - नाचो
छमछम-छमछम-छमछम-छमछम

सूरज गाये - चंदा गाये
पूरी कुदरत सुर में आये
फूलों का भी मन यूँ ललचे
खुश होकर खुशबू बरसायें
गमगम-गमगम-गमगम-गमगम

छोड़ो सारी दुनियादारी
आओ हमसे कर लो यारी
अपने हर पल को तुम कर लो
रौशन करने की तैयारी
पूनम-पूनम-पूनम-पूनम

हर कोई बच्चा बन जाये
रोना धोना कम हो जाये
सुख ही क्या दुःख पर भी फिर तो
हौले से हँसना आ जाये
मद्धम - मद्धम - मद्धम - मद्धम

- विशाल चर्चित

Thursday, January 26, 2017

गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ ......



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इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी मित्रों को हार्दिक बधाई देते हुए शुभकामनाएँ ......

कामना है कि देश के संविधान - उसके नियमों पर सच्चे दिल से अमल किया जाये
कामना है कि देश के तमाम कानूनों का हमेशा पूरी ईमानदारी से पालन किया जाये
कामना है कि लिंग-वर्ग-जाति तथा धर्म के आधार पर देश का बंटवारा न किया जाये कामना है कि देश से जुड़े दिनों को सिर्फ एक उत्सव-एक जश्न के रूप में न लिया जाये

/////// जय हिंद - वंदेमातरम /////// 

Wednesday, January 25, 2017

चहुँ ओर दिखे अंधियारा जब....


चहुँ ओर दिखे अंधियारा जब
सूझे न कहीं गलियारा जब,
जब दुखों से घिर जाओ तुम
जब चैन कहीं ना पाओ तुम...
मन व्याकुल सा - तन व्याकुल सा
जीवन ही लगे शोकाकुल सा,
कोई मीत न हो - कोई प्रीत न हो
लगता जैसे कोई ईश न हो....
तब ध्यान करो प्रकृति की तरफ
ईश्वर की परम सुकृति की तरफ,
देखो तो भला सागर की लहर
उठती - गिरती जाती है ठहर...
अनुभव तो करो शीतलता का
पुरवाई की कोमलता का,
तुम नयन रंगो हरियाली से
पुष्पों की सुगन्धित लाली से....
तुम गान सुनो तो कोयल का
बहती सरिता की कलकल का,
पंछी करते क्या बात सुनो
कहता है क्या आकाश सुनो....
निकालोगे निराशा के तम से
निकलो तो भला अपने तन से,
है आस प्रकाश भरा जग में
रंग लो हर क्षण इसके रंग में....
जो बीत गया सो बीत गया
तम से निकला वो जीत गया,
उस जीत का तुम अनुभव तो करो
अनुभव तो करो - अनुभव तो करो...

- VISHAAL CHARCHCHIT

Monday, January 23, 2017

उसकी घड़ी है बहुत बड़ी...


उसकी घड़ी
है बहुत बड़ी
दिखती है थोड़ी सुस्त
पर चलती है लगातार...
उसके कैमरे
छिपे हैं कण - कण में,
रखते हैं नजर
चप्पे - चप्पे पर
बिना रुके - बिना थके...
उसके एक - एक ऐप्स
हैं एकदम मुश्तैद
एकदम सजग
करते रहते हैं अपना काम
चुपचाप, बिना किसी शोर के...
इसलिये उससे चालाकी
उसकी आंख में धूल झोंकना
पड़ता है बहुत महंगा...
उधर उसकी एक कमांड
इधर सबकुछ या
कुछ बहुत खास
हो जाता है 'डिलीट'
यानी साफ...
या होने लगता है
कहीं - कुछ 'हैंग'
यानी चलने लगता है
रुक - रुककर
अटक - अटक कर...
यही है उसका न्याय
यही है उसकी सत्ता,
वो है हर समय - हर जगह
क्या हुआ जो नहीं है दिखता...

- विशाल चर्चित