Sunday, July 10, 2011

रोओ खूब रोओ...

वक़्त वो मरहम है
जो हर घाव भर देता है,
बुझे से बुझे चेहरों में भी
मुस्कान भर देता है...
बस थोडा सा सब्र
थोड़ी उम्मीद होनी चाहिए
आंसुओं की जगह आँखों में
एक हसीं ख्वाब जगह ले लेता है...
ये दुनिया अजीब है
यहाँ किसी के आने - जाने से
फर्क नहीं पड़ता है,
कोई एक ग़म देता है तो
कोई हज़ार ख़ुशी दे देता है...
रोना दवा या मकसद नहीं
गुबार होना चाहिए,
जो जितनी ज़ल्दी निकल जाये
इंसान उतनी ज़ल्दी हल्का हो लेता है...
तो रोओ खूब रोओ
क्योंकि बहुत ज्यादा रोना
बाद में बहुत ज्यादा मज़ा देता है..

2 comments:

  1. बढ़िया , आप के लेखन में व्यंग नहीं जीवन दर्शन ही छुपा है ..

    ReplyDelete