जीवनसंगिनी..........
ये एक शब्द मात्र नहीं
बल्कि एक पूरा संसार है
खुशियों का - खुशबुओं का
एहसासों का - मिठासों का
रिश्तों का - नातों का....
जीवनसंगिनी..........
एक संगी - एक साथी ही नहीं
बल्कि एक हिस्सा है
हर सुख - दुःख, हर धर्म - कर्म का
हर बात का - हर विचार का,
हर स्वभाव - हर व्यवहार का....
लेकिन ये सब तब है जबकि
हम इन सब चीज़ों को
मानें - महसूस करें,
ठीक उस तरह जैसे कि
हम एक मूर्ति को
मानें तो ईश्वर नहीं तो पत्थर......
ये एक शब्द मात्र नहीं
बल्कि एक पूरा संसार है
खुशियों का - खुशबुओं का
एहसासों का - मिठासों का
रिश्तों का - नातों का....
जीवनसंगिनी..........
एक संगी - एक साथी ही नहीं
बल्कि एक हिस्सा है
हर सुख - दुःख, हर धर्म - कर्म का
हर बात का - हर विचार का,
हर स्वभाव - हर व्यवहार का....
लेकिन ये सब तब है जबकि
हम इन सब चीज़ों को
मानें - महसूस करें,
ठीक उस तरह जैसे कि
हम एक मूर्ति को
मानें तो ईश्वर नहीं तो पत्थर......
खूबसूरत ||
जवाब देंहटाएंहो तुम ||
मेरी नजरों ने कहा |
जरूरत हो तुम-
जिगर के टुकड़ों ने कहा |
सम्पूरक हो तुम ||
अधरों ने कहा ||
बेहतर हो तुम |
मंदिर की मूरत ने कहा ||
वाह क्या खूब कहा है सच है मानो तो सब कुछ वरना कुछ भी नही।
जवाब देंहटाएंपत्नी सात फेरों का नही,
जवाब देंहटाएंसमझ की फेर का परिणाम है |
पति की प्रसन्नता पर,
पूर्ण विराम है |
http://www.rajesh-raj-kavilok.blogspot.com/
वाह ..बहुत खूब
जवाब देंहटाएंआपके ब्लोग की चर्चा गर्भनाल पत्रिका मे भी है और यहाँ भी है देखिये लिंक ………http://redrose-vandana.blogspot.com
जवाब देंहटाएं