Friday, September 30, 2011

जीवनसंगिनी..........

जीवनसंगिनी..........
ये एक शब्द मात्र नहीं
बल्कि एक पूरा संसार है
खुशियों का - खुशबुओं का
एहसासों का - मिठासों का
रिश्तों का - नातों का....
जीवनसंगिनी..........
एक संगी - एक साथी ही नहीं
बल्कि एक हिस्सा है
हर सुख - दुःख, हर धर्म - कर्म का
हर बात का - हर विचार का,
हर स्वभाव - हर व्यवहार का....
लेकिन ये सब तब है जबकि
हम इन सब चीज़ों को
मानें - महसूस करें,
ठीक उस तरह जैसे कि
हम एक मूर्ति को
मानें तो ईश्वर नहीं तो पत्थर......

6 comments:

  1. खूबसूरत ||
    हो तुम ||
    मेरी नजरों ने कहा |
    जरूरत हो तुम-
    जिगर के टुकड़ों ने कहा |
    सम्पूरक हो तुम ||
    अधरों ने कहा ||
    बेहतर हो तुम |
    मंदिर की मूरत ने कहा ||

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  2. वाह क्या खूब कहा है सच है मानो तो सब कुछ वरना कुछ भी नही।

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  3. पत्नी सात फेरों का नही,
    समझ की फेर का परिणाम है |
    पति की प्रसन्नता पर,
    पूर्ण विराम है |
    http://www.rajesh-raj-kavilok.blogspot.com/

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  4. अथ आमंत्रण आपको, आकर दें आशीष |
    अपनी प्रस्तुति पाइए, साथ और भी बीस ||
    सोमवार
    चर्चा-मंच 656
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  5. वाह ..बहुत खूब

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  6. आपके ब्लोग की चर्चा गर्भनाल पत्रिका मे भी है और यहाँ भी है देखिये लिंक ………http://redrose-vandana.blogspot.com

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