Monday, October 03, 2011

ये मेरे कुछ शेर..........

मिला आसानी से जब दिल बहुत सस्ता समझ बैठे
बहुत पछतायेंगे वो कल जब इसको खो चुके होंगे.......

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खुमारी ही उतर जाये तो इश्क बेमतलब हुआ जानो
मिले मंजिल सुकून ए दिल नयी मंजिल तलाशो फिर
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रूठ कर जायेंगे भी तो जाइए खूब शौक से
इस जहां के उस तरफ भी हम मनाने आयेंगे...
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बैठकर कुछ पल को जब दरिया को देखा गौर से
ज़िंदगी मुझको अचानक एकदम ठहरी लगी....
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फासला जिस्मानी है जो दरमियाँ तो क्या हुआ
बस दिलों के बीच नजदीकी रहे काफी विशाल....

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5 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति ||
    बधाई |

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  2. बैठकर कुछ पल को जब दरिया को देखा गौर से
    ज़िंदगी मुझको अचानक एकदम ठहरी लगी....

    सुन्दर....

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  3. विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक यह पर्व, सभी के जीवन में संपूर्णता लाये, यही प्रार्थना है परमपिता परमेश्वर से।
    नवीन सी. चतुर्वेदी

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  4. खुमारी ही उतर जाये तो इश्क बेमतलब हुआ जानो
    मिले मंजिल सुकून ए दिल नयी मंजिल तलाशो फिर..

    जोरदार...

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