सोमवार, मई 07, 2012
बुधवार, अप्रैल 18, 2012
सोमवार, अप्रैल 16, 2012
नशा सुखद पड़ाव है मंजिल नहीं.....
होता है कभी - कभी कि
जिस तरफ जाना हमारे लिए
होता है नुकसानदायक
होता है कई बार गलत भी
दिल जाता है बार - बार
अक्सर उधर ही - उसी तरफ....
जैसे कि मना किया जाए अगर
नहीं करना ये काम तुम्हें
ये गलत है - ये पाप है
तो मान लेता है हमारा दिमाग
लेकिन कहाँ मानने वाला है दिल
वो बार - बार जाएगा उसी चीज़ पर....
जानते हैं सभी कि नशा कोई भी हो
होता है बहुत बुरा - बहुत घातक,
जानता है ये बात वो नशेडी भी
जो हो चुका है इसका आदी,
लेकिन जब लगती है तलब
जब करना शुरू करता है दिल जिद
नहीं याद रहता कुछ भी उसे, और -
बढ़ जाते हैं कदम खुद - ब - खुद
उस तरफ....उस नशे की तरफ.....
क्योंकि ये देता है उसके दिल को
एक सुकून - एक राहत और शायद
कुछ पल के लिए एक नयी ज़िन्दगी भी....
कितना अच्छा होता कि अगर
अच्छा होता उसके लिए ये नशा,
कितना अच्छा होता कि हमेशा रहता
ज़िन्दगी में ऐसा ही सुकून और
हमेशा रहती ऐसी ही राहत,
कुछ ऐसे ही ख्वाहिशें कर रहा होता है
उस नशेडी का एक बच्चे जैसा दिल,
लेकिन सच्चाई तो फिर सच्चाई है
कि बुरी चीज़ बुरी थी - बुरी है और
हमेशा बुरी ही रहेगी उसके लिए....
इससे जितनी ज़ल्दी उबर जाए उतना अच्छा
क्योंकि ये नशा - ये ख़ुशी - ये सुकून
हो सकता है एक सुखद पड़ाव
लेकिन ज़िन्दगी के लिए एक मंजिल
कभी नहीं - कभी नहीं - कभी नहीं !!!!
- VISHAAL CHARCHCHIT
जिस तरफ जाना हमारे लिए
होता है नुकसानदायक
होता है कई बार गलत भी
दिल जाता है बार - बार
अक्सर उधर ही - उसी तरफ....
जैसे कि मना किया जाए अगर
नहीं करना ये काम तुम्हें
ये गलत है - ये पाप है
तो मान लेता है हमारा दिमाग
लेकिन कहाँ मानने वाला है दिल
वो बार - बार जाएगा उसी चीज़ पर....
जानते हैं सभी कि नशा कोई भी हो
होता है बहुत बुरा - बहुत घातक,
जानता है ये बात वो नशेडी भी
जो हो चुका है इसका आदी,
लेकिन जब लगती है तलब
जब करना शुरू करता है दिल जिद
नहीं याद रहता कुछ भी उसे, और -
बढ़ जाते हैं कदम खुद - ब - खुद
उस तरफ....उस नशे की तरफ.....
क्योंकि ये देता है उसके दिल को
एक सुकून - एक राहत और शायद
कुछ पल के लिए एक नयी ज़िन्दगी भी....
कितना अच्छा होता कि अगर
अच्छा होता उसके लिए ये नशा,
कितना अच्छा होता कि हमेशा रहता
ज़िन्दगी में ऐसा ही सुकून और
हमेशा रहती ऐसी ही राहत,
कुछ ऐसे ही ख्वाहिशें कर रहा होता है
उस नशेडी का एक बच्चे जैसा दिल,
लेकिन सच्चाई तो फिर सच्चाई है
कि बुरी चीज़ बुरी थी - बुरी है और
हमेशा बुरी ही रहेगी उसके लिए....
इससे जितनी ज़ल्दी उबर जाए उतना अच्छा
क्योंकि ये नशा - ये ख़ुशी - ये सुकून
हो सकता है एक सुखद पड़ाव
लेकिन ज़िन्दगी के लिए एक मंजिल
कभी नहीं - कभी नहीं - कभी नहीं !!!!
- VISHAAL CHARCHCHIT
रविवार, अप्रैल 15, 2012
शुक्रवार, अप्रैल 13, 2012
बुधवार, अप्रैल 11, 2012
रिश्ता.....
रिश्ता चाहे कोई भी हो
तब तक रहता है अधूरा
जब तक नहीं मिलते दिल से दिल,
जज्बातों से जज़्बात, विचारों से विचार
तरंगों से तरंगें और चाहत से चाहत....
नहीं चल सकता कोई भी रिश्ता
बहुत देर तक एकतरफा
ठीक उसी तरह जिसतरह से
नहीं बज सकती हैं कभी भी
सिर्फ एक हाथ से ताली और
नहीं चल सकती हैं बहुत दूर तक
सिर्फ एक पहिये पर कोई भी गाडी....
उसने हाथ दिया तो
तुम्हें भी हाथ बढ़ाना पड़ेगा,
किसी का साथ चाहिए
तो साथ निभाना पड़ेगा....
किसी से हक़ चाहिए तो
पड़ता है हक़ देना भी,
कभी - कभी पड़ता है सुनाना और
कभी - कभी पड़ता है सुनना भी,
रूठना - मनाना और झगड़ना भी.....
इसके अलावा ज़रूरी है रिश्ते के प्रति
वफादारी और ज़िम्मेदारी भी,
अब इन्हें निभा सकते हो तो निभाओ
वर्ना अकेले रह जाओ
बस खुद के लिए जीते जाओ....
जहां नहीं होगा कोई रोकनेवाला
नहीं होगा कोई टोकनेवाला
न होगा कोई रूठनेवाला - न मनानेवाला
न अकड़नेवाला - न झगड़नेवाला,
चलाओ अपनी मनमानी और
जब तक चाहो जियो अपने तरीके से....
लेकिन कब तक ?
कभी तो सताएगा अकेलापन?
कभी तो कमजोर होगी ताकत?
कभी तो लड़खडायेंगे तुम्हारे कदम?
याद रखो जश्न मनाओ तो
साथ देने वाले बहुत मिल जाते हैं,
पेट भरा हो तो खिलानेवाले बहुत मिल जाते हैं
सुख में साथ निभानेवाले बहुत मिल जाते हैं
लेकिन दुःख की घडी में - ज़रुरत हो तो
याद आता है कोई अपना ही और
काम भी आता है कोई अपना ही.....
ये बात एक पत्थर की लकीर है
जब चाहो आजमाना, ताकि -
कभी - किसी मोड़ पर तुम्हें
न पड़े हाथ मलना - न पड़े पछताना....
- VISHAAL CHARCHCHIT
तब तक रहता है अधूरा
जब तक नहीं मिलते दिल से दिल,
जज्बातों से जज़्बात, विचारों से विचार
तरंगों से तरंगें और चाहत से चाहत....
नहीं चल सकता कोई भी रिश्ता
बहुत देर तक एकतरफा
ठीक उसी तरह जिसतरह से
नहीं बज सकती हैं कभी भी
सिर्फ एक हाथ से ताली और
नहीं चल सकती हैं बहुत दूर तक
सिर्फ एक पहिये पर कोई भी गाडी....
उसने हाथ दिया तो
तुम्हें भी हाथ बढ़ाना पड़ेगा,
किसी का साथ चाहिए
तो साथ निभाना पड़ेगा....
किसी से हक़ चाहिए तो
पड़ता है हक़ देना भी,
कभी - कभी पड़ता है सुनाना और
कभी - कभी पड़ता है सुनना भी,
रूठना - मनाना और झगड़ना भी.....
इसके अलावा ज़रूरी है रिश्ते के प्रति
वफादारी और ज़िम्मेदारी भी,
अब इन्हें निभा सकते हो तो निभाओ
वर्ना अकेले रह जाओ
बस खुद के लिए जीते जाओ....
जहां नहीं होगा कोई रोकनेवाला
नहीं होगा कोई टोकनेवाला
न होगा कोई रूठनेवाला - न मनानेवाला
न अकड़नेवाला - न झगड़नेवाला,
चलाओ अपनी मनमानी और
जब तक चाहो जियो अपने तरीके से....
लेकिन कब तक ?
कभी तो सताएगा अकेलापन?
कभी तो कमजोर होगी ताकत?
कभी तो लड़खडायेंगे तुम्हारे कदम?
याद रखो जश्न मनाओ तो
साथ देने वाले बहुत मिल जाते हैं,
पेट भरा हो तो खिलानेवाले बहुत मिल जाते हैं
सुख में साथ निभानेवाले बहुत मिल जाते हैं
लेकिन दुःख की घडी में - ज़रुरत हो तो
याद आता है कोई अपना ही और
काम भी आता है कोई अपना ही.....
ये बात एक पत्थर की लकीर है
जब चाहो आजमाना, ताकि -
कभी - किसी मोड़ पर तुम्हें
न पड़े हाथ मलना - न पड़े पछताना....
- VISHAAL CHARCHCHIT
ये पल - ये लम्हे - ये घड़ियाँ....
कुछ पल, होते हैं बहुत मधुर
होते हैं बहुत यादगार,
समा जाते हैं जाते हैं अक्सर
दिल के किसी कोने में
एक मीठी सी याद बनकर...
कुछ लम्हे, होते हैं बड़े कठिन
लेते हैं हमारा इम्तहान और
गुजर जाते हैं यूँ ही अक्सर
दिल को खरोच कर.....
कुछ घड़ियाँ, आती हैं और लाती हैं
ढेर सारे सपने - ढेर सारे अरमान
आने वाले एक सुनहरे कल के
जगा जाती हैं आँखों में अक्सर....
ये पल - ये लम्हे - ये घड़ियाँ
वाकई हैं बहुत ज़रूरी ताकि
इनसे मिली खुशियों पर हम
दिल खोल कर मुस्कुरा सकें,
इनसे मिलें तमाम कटु अनुभवों से
आगे का रास्ता निष्कंटक बना सकें
और इनके द्वारा जगाये हुए
सपनों का पीछा करते हुए
कुछ ख़ास कामयाबियों को
अपने क़दमों के नीचे ला सकें....
इसलिए इन्हीं यूँ ही न बिता दो
इन्हें यूँ ही बेकार में न गंवा दो
इसलिए उठो - सोचो - कुछ करो
और इनके सहारे ज़िन्दगी को
बेहद खूबसूरत बना दो !!!
- VISHAAL CHARCHCHIT
होते हैं बहुत यादगार,
समा जाते हैं जाते हैं अक्सर
दिल के किसी कोने में
एक मीठी सी याद बनकर...
कुछ लम्हे, होते हैं बड़े कठिन
लेते हैं हमारा इम्तहान और
गुजर जाते हैं यूँ ही अक्सर
दिल को खरोच कर.....
कुछ घड़ियाँ, आती हैं और लाती हैं
ढेर सारे सपने - ढेर सारे अरमान
आने वाले एक सुनहरे कल के
जगा जाती हैं आँखों में अक्सर....
ये पल - ये लम्हे - ये घड़ियाँ
वाकई हैं बहुत ज़रूरी ताकि
इनसे मिली खुशियों पर हम
दिल खोल कर मुस्कुरा सकें,
इनसे मिलें तमाम कटु अनुभवों से
आगे का रास्ता निष्कंटक बना सकें
और इनके द्वारा जगाये हुए
सपनों का पीछा करते हुए
कुछ ख़ास कामयाबियों को
अपने क़दमों के नीचे ला सकें....
इसलिए इन्हीं यूँ ही न बिता दो
इन्हें यूँ ही बेकार में न गंवा दो
इसलिए उठो - सोचो - कुछ करो
और इनके सहारे ज़िन्दगी को
बेहद खूबसूरत बना दो !!!
- VISHAAL CHARCHCHIT
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