मंगलवार, मार्च 02, 2021

पक ही जाती है 'इश्किया खिचड़ी'...

alt='ISHQIYA_KHICHADI'
चूल्हा यहाँ पर
पतीला वहाँ पर,
फिर भी पक ही
जाती है
'इश्किया खिचड़ी',
जिससे आ जाता है
जायका ज़िन्दगी में,
और लगती है चलने
जैसे कि फिसली...

एक का चावल
दूसरे की दाल,
मुलाक़ात हो तो
तड़का कमाल...

कभी आ ही जाती है
बातों में मिर्ची,
कभी हो ही जाती हैं
नज़रें भी तिरछी...

कुछ खोजते हैं तब
तोहफ़े की लस्सी,
तो कुछ ढूंढते
आत्महत्या की रस्सी...

- विशाल चर्चित 
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रविवार, फ़रवरी 14, 2021

प्रेम - प्रेम चिल्लाय रहेव है...

दर्जन भर का दिल बाँटेव औ
प्रेम - प्रेम चिल्लाय रहेव है,
इधर - उधर मुँह मारत हौ तुम
कूकुर से बनि जाय रहेव है...

वलेन्टइनवा भारत आयेस
जाइ के सबका ब्याह पढ़ायेस,
सब गोरन का मनई बनायेस,
औ अब तुम उनसे कचरा लइके
अइसी - तइसी कराय रहेव है...

बात गौर से सोचव कि ई
कौन सभ्यता लाय रहेव है,
एह तरह औलादन का तुम
पाठ कौन तुम पढ़ाय रहेव है...

कहैं 'चर्चित' कविराय सुनौ
तुम भले दर्जनभर भाय
बहिन औ मित्र बनाओ,
लेकिन दिल तौ बाबू
एकय से ही लगाओ,
अउर फिर आवय
आंधी या तूफान मगर
तुम वही का ब्याह के
अपने जीवन मा लाओ
औ जीवनभर साथ निभाओ...

बात समझ मा आई या कि
ओइसे मुंडी हिलाय रहेव है,
चाल-चलन बदलव वर्ना खुद
अपने पैर मा कुल्हाड़ी चलाय रहेव है...

HAPPY VALENTINE'S DAY

- विशाल चर्चित

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मंगलवार, फ़रवरी 02, 2021

सोमवार, फ़रवरी 01, 2021