मंगलवार, जनवरी 24, 2012

' नुमाइशी महिलाएं - यहाँ आ जाएँ '

आजकल सुन्दर नुमाइशी महिलाओं की मांग काफी बढ़ गयी है........पहले तो खाली सौन्दर्य प्रसाधनों और महिलाओं और घर - गृहस्थी से जुडी चीज़ों के विज्ञापन के लिए ही इनकी ज़रुरत होती थी लेकिन आजकल तो हर जगह इनका ही बोलबाला है.........अब भला बताइये कि नयी कार की लॉन्चिंग में भला इनका क्या काम?? लेकिन नहीं आप देखेंगे कि कार के दोनों तरफ दो सुन्दर बालाएं विराजमान ही रहती हैं...........क्रिकेट - फ़ुटबाल के मैच में सोचिये कि सुंदरियों का क्या काम पर वहाँ भी चीयर लीडर बनाकर बुला लिया जाता है...........कुछ डांस - वांस दिखाकर लोगों को बांधकर रखने के लिए.........तमाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों - पुरस्कार वितरण समारोहों में भी मंच संचालन में भी इनकी मौजूदगी अनिवार्य हो गयी है..........यहाँ इनका काम सिर्फ कागज़ में से देख - देखकर अंग्रेजी में विजेताओं का नाम पुकारना होता है.........नेता लोग भी चुनाव प्रचार में अपने साथ दो - चार को रखते ही हैं........इनका काम भाषण नहीं बल्कि सिर्फ हाथ हिलाना होता है.......अब जब हर क्षेत्र में इन नुमाइशी महिलाओं की घुसपैठ हो गयी है तो हमारे साहित्यकार भाई लोग कहाँ से पीछे रहते..........उन्होंने भी शुरू कर दिया इनके जादू का सहारा लेना............अब चाहे रचना या ग़ज़ल का सौन्दर्य से लेना - देना हो या न हो एक सुन्दर बाला ला कर कड़ी कर देते हैं...........लिख रहे हैं जीवन दर्शन पर माता जी की फोटो होना जरूरी है.........सुना रहे हैं ग़ज़ल में अपनी ज़िन्दगी का दुखड़ा पर यहाँ भी वो बाई जी मौजूद हैं..........इस बारे में इन महारथियों का मानना है बिना किसी आकर्षण के इनकी रचना पे किसी कि नज़र ही नहीं जाती........मैंने भी सोचा कि यार इनकी बात तो ठीक है.......कोई चुम्बक तो होना ही चाहिए पाठकों को खींचने के लिए...........तो इसतरह अब जाकर मेरी आँख खुली और पता चला कि आखिर लोग कैसे बहुत जल्दी बड़े साहित्यकार बन जाते हैं........उनके पाठकों की संख्या दिन - दूनी रात चौगुनी दर से बढती हैं जबकि हमारी रचनाओं पे हमेशा पतझड़ ही छाया रहता है........इसलिए सोचा है की अब अपन भी सुन्दरता का जादू चलाएंगे..........तो लीजिये पहला नमूना पेश है.............!!!

रविवार, जनवरी 15, 2012

ये मेरे कुछ शेर.....

चलो तुम मिल गए मुझको खुदा का शुक्र है यारा 
नहीं तो दिल-मुहब्बत-आशिकी ये कौन समझाता 
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ठहाके गूंजने दो मत दखल दो आ के तुम 'चर्चित'
तुम्हारी मौत पर मायूश थे कल ये सभी अपने 
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आज की रात है मातम, ज़रा इसका मज़ा ले लो 
सुबह कल किस ख़ुशी में क्या पता हँसना पड़े तुमको
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आज की रात है मातम, ज़रा इसका मज़ा ले लो 
सुबह कल किस ख़ुशी में क्या पता हँसना पड़े तुमको 
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दिल फकीरी की तरफ अब कुछ कदम और बढ़ चला है
कहते थे अपना जिसे हम, गैरों सा कुनबा हो चला है.... 
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कोई जब दिल को छू दे तो कलम चल पड़ती है यूं ही
शुरू हो जाता है फिर दौर कई ताज़ा फसानों का...... 
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यहाँ पे ग़म बहुत अक्सर रुलाने को जमाने में
कहाँ बहलायें दिल जाकर जहां देखो वहीँ मातम.... 
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कभी किसी का बहुत ख़ास-ओ-अज़ीज़ न बन 
कि बहुत मिठास कई बीमारियाँ ले आती है... 
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ये चांदमारी तुम्हारी, आफत में जां हमारी
निशाना लगे कि चूके, मौत पक्की हमारी 
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अब इसको कहें मुहब्बत या एक महज़ फितूर
उसने वो पढ़ लिया मैंने लिखा नहीं........ 
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ख़्वाबों में भी कभी हम बेवफा न थे
फिर भी न जाने क्यों वो हैं खफा - खफा..... 
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सुना कर दास्तान - ए - ग़म अगर राहत मिले तुमको
सुनाते जाओ यूं ही तुम कि जब तक सांसें हैं मेरी..... 
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इस दिल में आते - जाते हैं अक्सर तमाम लोग
पर जिस तरह से तुम गए हो जाया नहीं जाता 
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करते हैं कई लोग किताबी बातें तो बहुत अच्छी 
पर मैदान छोड़ देते हैं जब हकीकत से पड़े पाला 
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रिश्तों को समझने में कई खा जातें हैं चक्कर
कि जिनको शूरमा कहते कई मोर्चों पे लोग अक्सर 
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शर्म आती नहीं तुमको यूं मुझको बेवफा कहते
खड़े हैं मोड़ पर अब भी जहां पे तुमने छोड़ा था 
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बहुत ज्यादा तकल्लुफ क्यों अगर अपना कहा तुमने
पकड़ लो रास्ता सीधा जो दिल के इस तरफ आता.... 
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आशिकी में होशियारी आम होती जा रही
यार की आँखों अब चश्में से देखा जा रहा 
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आपको देखे से बढती आँखों में कुछ रौशनी
बेवजह देखा करें अब इतने हम पागल नहीं 
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दिखती कहाँ हैं आज कल इतनी दरियादिली
अब तो एहसान बाद में पहले जताया जाता है 
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उन्हें गुमान है अपने हुस्न पर हमें प्यारी है खुद्दारी
उन्हें महफ़िल का चस्का है हमें यारी-ओ-दिलदारी 
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कोई इंसां हो तो बात करें एक पत्थर से उम्मीद नहीं
जो शोर बहुत करता है पर दिल जैसी कोई चीज़ नहीं 
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जब ग़मों का दौर हो तो हौसला ज़रूरी है
जिस तरह से तैरना होता है दरिया के खिलाफ
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अच्छा है सताती हैं मेरी यादें तुम्हें अक्सर
चलो इसी बहाने दिल से आवाज़ तो आती है 
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वो आदतन चलाता है अपनी मर्ज़ी हम आदतन रूठ जाते हैं
यूं इस तरह उससे दिल के तार अक्सर जुड़ते हैं छूट जाते हैं 
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ये कोई मामूली नहीं दर्द - ए - इश्क है
आते - आते आया है, जाते - जाते जाएगा....
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तुम घबराया न करो यूं उसके जाने से ' चर्चित '
वो बार - बार जाता है बार - बार आने के लिए 
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नहीं कोई घाव है ऐसा कि जिसको भर न पाए वक़्त
सही मरहम मिले तो ज़िन्दगी फिर से चहकती है.... 
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लगता है तुम्हें शौक है पहेलियाँ बुझाने का
वर्ना इस तरह से दर्द बयाँ कौन करता है 
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जुड़े हों दिल इरादे हों तो मुश्किल कुछ नहीं चर्चित
जो रूठा है वो मानेगा अगर तबियत से कोशिश हो 
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क्या मज़ा है इश्क में जो अगर रूठें न वो
उनके तीखे तेवरों का लुत्फ़ ही कुछ और है 
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बहुत गहरी उदासी है किसी सदमे में हो शायद
नहीं तो इस कदर तकदीर को कोसा नहीं जाता 
                   
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गुरुवार, जनवरी 12, 2012

भ्रष्टाचार की जय !!!!

पिछले कुछ समय से काफी जोर - शोर हो - हल्ला मचाया जा रहा है कि "लोकपाल विधेयक लाओ - भ्रष्टाचार मिटाओ"............"नहीं रहेगा नामोनिशान भ्रष्टाचार का".......तो भाई अब मैं पूछता हूँ कि खाने का काम है क्या??? लाख़ों सालों से चली आ रही.........हमारे देश के कण - कण में व्याप्त भ्रष्टाचार कि परम्परा को कुछ महीनों या सालों में हटा दोगे क्या........??? अरे हजारों साल पहले चार्वाक ऋषि ने जीने के लिए एक मन्त्र बतलाया था कि "यावत जीवेत सुखं जीवेत, ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत".........अर्थात जब तक जियो सुख से जियो, कर्ज लेना पड़े तो लो पर घी पियो.........और हममे से तमाम लोग आज तक इसी मन्त्र पर अमल कर रहे हैं......जैसे कि कोशिश रहती है कि बस - ट्रेन में टिकट न लेना पड़े.........लाइन में न लगना पड़े.......स्कूल में अध्यापक को कैसे भी खुश करके परीक्षा में अच्छे अंक लाये जांय......ले - दे के सरकारी नौकरी पा ली जाय......ताकि ऊपरी आमदनी का मजा लिया जा सके.......राशन कार्ड - ड्राइविंग लाइसेंस हर काम ले दे के करवाने का जुगाड़ी आयडिया........सब भ्रष्टाचार के ही अलग -अलग रूप हैं............कहाँ - कहाँ मिटाओगे ??? कहाँ - कहाँ लोकपाल बिठाओगे ??? और लोकपाल क्या आसमान से आयेंगे क्या??? उनके बंगला - गाडी - विदेश यात्रा के सपने नहीं होंगे क्या ??? उन्हें अपने बच्चे को विदेश नहीं पढाना होगा क्या ??? पढ़ाई के बाद उसका कैरियर नहीं बनाना ?? उन्हें अपनी बेटी की शादी किसी अमीर घर में नहीं करना क्या ??? और एक बात , मान लीजिये कि 100 में 10 भ्रष्ट नहीं भी हुए तो क्या बना - बिगाड़ लेंगे......हमारे कलमाड़ी, राजा, सुखराम, कनिमोझी, यदुरप्पा, लालू और नीरा राडिया जैसे महारथी अपने खून - पसीने से लगातार सींच रहे हैं भ्रष्टाचार के वृक्ष को.......ऐसे कैसे सूख जाएगा.......??? अरे लोकपाल विधेयक अगर लागू हो भी गया तो क्या हो जाएगा.........जहां - जहां दिक्कत होगी संशोधन कर लिया जाएगा.......जितने लोकपाल पटते हैं पता लिया जाएगा.........वर्ना रास्ते से हटा दिया जाएगा.........सीबीआई - इनकम टैक्स वालों को पीछे ला दिया जाएगा.......इधर - उधर फंसा दिया जाएगा.......उनको उनकी औकात बता दिया जाएगा........यानी कि भ्रष्टाचार था - है - और रहेगा..........तो इसी बात पर बोलो प्रेम से............भ्रष्टाचार की जय !!!!

रविवार, जनवरी 01, 2012

चलिए चला गया 2011....

चलिए चला गया 2011 
ले गया अपने साथ -
देव - शम्मी - नवाब पटौदी 
भीमसेन जोशी, जगजीत सिंह और
मकबूल फ़िदा हुसैन साहब को,
दे गया राहत दुनिया को -
ओसामा और गद्दाफी से.....
साथ में दे गया सिर दर्दियाँ -
तमाम घोटालों और महंगाई की 
लुढ़कते सेंसेक्स और रुपये की,
भ्रष्टाचार और लोकपाल पर
राजनीति और कूटनीति की....
लीजिये आ रहा है 2012
कामना है कि लाये अपने साथ -
कुछ ख़ास उपलब्धियां
कुछ ख़ास खुशहालियां,
दे जाए कुछ राहत -
बढती महंगाई से - भ्रष्टाचार से
बढ़ते अपराधों और घोटालों से,
कर जाए पूरी तरह से सफाया -
आतंकवादियों - नक्सलवादियों का
भुखमरी और बेरोज़गारी का....
और दे जाए कुछ सदबुद्धि - 
हमारे राजनेताओं को कि
अपने बारे में ही नहीं 
कुछ देश के बारे में भी सोचें,
हमारे युवाओं को कि
पति - पत्नी - प्रेमिका के अलावा
माँ - बाप के बारे में भी सोचें....
फेसबुक के साथ - साथ 
लाइफ बुक के बारे में भी कुछ सोचें...
बाहरी तकनीक की नक़ल के साथ-साथ
अपनी अक्ल लगाने पर भी कुछ सोचें...
पिज्जा - बर्गर - कोक निगलते हुए
कम उम्र में ही बढ़ते मोटापे और 
बिगड़ते स्वास्थ्य पर भी कुछ सोचें...
टीवी पर बेमतलब मनोरंजन के साथ - साथ
सार्थक कार्यक्रमों पर भी कुछ सोचें.....
बहुत हो गया..........चलिए अब हम
आप सभी को नए साल के लिए 
हार्दिक शुभकामना भी तो दे दें.........
" नया साल हम सभी के लिए 
विशेष सुख - शांतिमय, हर्ष - आनंदमय, 
सफलता - उन्नति - यश - कीर्तिमय और
विशेष स्नेह - प्रेम एवं सहयोगमय हो !!!!

रविवार, दिसंबर 25, 2011

अटल जी के जी जन्मदिवस पर..........


हे काल पुरुष है नमन तुम्हें
इस जन्मदिवस के अवसर पर,
अरे आज तो कुछ बोलो मुख से
इस जन्मदिवस के अवसर पर....
राजनीति है दिशाहीन
चहुँ ओर व्याप्त अंधियारा है,
लोकपाल पर सब चकराए
हर दल इस पर हारा है....
नेतृत्व तुम्हारा स्मरण हो रहा
जब पक्ष - विपक्ष था नत - मस्तक,
सारे घटकों में थी एकता
एक तुम सत्ता में थे जब तक....
अमरीका रह गया देखता
भारत परमाणु शक्ति बन बैठा,
समस्त विश्व को बता दिया कि
देश आत्मनिर्भर हो बैठा....
कारगिल के बाद पाक को
सबसे अलग - थलग करवाया,
आतंकवाद का केंद्र यही है 
यह पूरे विश्व से मनवाया....
यदि रह जाते कुछ वर्ष और 
एक महाशक्ति होता ये देश,
कुछ क्षुद्र समस्याओं में ऐसे
कभी नहीं उलझता ये देश....
माना कि आयु हुई बाधक
और स्वास्थ्य भी साथ नहीं देता,
पर आप चुप रहे हर समस्या परसच, मानने का मन नहीं होता......

ईश्वर से आपके सुदीर्घ जीवन की
विशेष कामना के साथ 

शुक्रवार, दिसंबर 09, 2011

ये मेरे कुछ शेर..........

उनके ग़म - उनकी यादों के अलावा भी है बहुत कुछ
क्या भूल गयी इतनी ज़ल्दी माँ की वो लोरियां.... ?
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शोला है तो भड़केगा हवा दें या कि पानी दें
जिन्हें जलना है जलते हैं बिना अंगारों के भी यार 
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तरीके और भी हैं यूं तुम्हारे पास रहने के
मगर डर है नज़र लग जाएगी हमारी इस मुहब्बत को
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तुम्हें मालूम क्या कि क्या बला हो तुम अदाओं में
खुदा भी खुद बनाकर जल गया होगा तुम्हें शायद 
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अजी क्या खूब है दावा मुहब्बत में निभाने का
चलो एक बार फिर से ओखली में सिर देके देखेंगे 
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आप यूं याद करते रहा न करें
हिचकियाँ हैं सताती हमें रात - दिन
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बात खूबसूरती से शुरू होती थी तब भी अब भी
पर सूरत से शुरू किस्सा सीरत पे ख़त्म होता है 
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यूं इस कदर तन्हाई अगर रास आ गयी
तो पहले कदम पर ही इश्क दम तोड़ जाएगा
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उनके लिए जब आँखें गंगोत्री हो चली
उम्मीद है कि एक दिन संगम भी आएगा
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खबर क्या थी यारों कि ये दिन भी होगा
अपने ही घर में बेगानों सी हालत........
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दौलत - ए - ग़म बहुत है सम्हालें कहाँ - कहाँ
अश्कों से भीगी ज़िन्दगी सुखाएं कहाँ - कहाँ 
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चलो कुछ काम तो आया मुहब्बत में फना होना
हमारे नाम का जलवा तुम्हारे शहर तक पहुंचा......
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मुहब्बत में ग़लतफ़हमी तो अक्सर हो ही जाती है
मगर जब दिल जुड़े हों तो बुरा कुछ भी नहीं होता 
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चलो अच्छा हुआ कि बच गए तुम ख़ाक होने से
नहीं तो तुम शहीद - ए - इश्क में भी नाम कर जाते
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ऐसा नहीं कि आपकी ज़रुरत नहीं रही
गैरों में रहके आपका ही नाम लिया है
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जरूरत क्या जुदाई की जब दिल में इतनी चाहत हो
जाओ आजमाओ पहले दिल और अपनी चाहत को
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लोगों को आस सावन की तो सहरा क्या दिखाना
उनकी तमाम उम्मीदों पे अब पानी क्या फिराना
माना तस्वीर पुरानी है पर दिल तो है नया - नया
ख़्वाबों का ये नया घरौंदा अब यूं भी क्या गिराना 

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रविवार, दिसंबर 04, 2011

Its my tribute to DEV SAAHAB..............

जिसकी आँखें नहीं थी कोई मामूली आँखें
जिसकी मुस्कराहट नहीं थी कोई मामूली मुस्कराहट
जो करोड़ों दिलों की जैसे रहा हो ज़िन्दगी
वो दिल की वजह से गया ज़िन्दगी से
नहीं मानता दिल - नहीं मानता.....
जिसने ना जाने कितने ही सपने दिए
जिसने न जाने कितनी खुशियाँ बिखेरी
जो जैसे आशिकी की रहा हो एक किताब
वो हुआ बंद पन्नों में यूं इस तरह
नहीं मानता दिल - नहीं मानता.....
जिसने जो भी किया पूरे दिल से किया
जिसने कितनों को सबब जीने का दे दिया
रुपहले परदे की इतने सालों जो पहचान था
वो यूं कभी परदे के पीछे भी जाएगा
नहीं मानता दिल - नहीं मानता.....