शुक्रवार, जून 23, 2017

कमजोर पड़ता दिख रहा अब 'देसी' च्यवनप्रास...


कर्म करके फल पायें ये आम बात है, कर्म कोई और करे लेकिन फल पायें हम ये खास बात है... अध्यापक पढ़ाये और हम मेहनत से पढ़ाई करें परीक्षा में प्रश्नपत्र हल करें और तब पास हों ये आम बात है, हम करें घुमाई अध्यापक पढ़ाये वही हल करे प्रश्नपत्र परीक्षा में और हम अच्छे अंकों से पास हो जायें तो ये खास बात है... बच्चे विद्यालय जायें शिक्षक मन लगाकर पढ़ायें अधिकांश बच्चे पास हो जायें ये आम बात है, बच्चे विद्यालय जायें शिक्षक चुटकुले सुनायें पढ़ने के लिये कोचिंग बुलायें जो जाये कोचिंग सिर्फ वही हो पास तो ये खास बात है... महीने भर मेहनत से काम करें और तब पायें तन्ख्वाह ये आम बात है, घर में बैठ कर भी लगे हाजिरी और पायें मोटी तन्ख्वाह तो ये खास बात है... नौ महीने तक तमाम तकलीफें सहें तब कहीं जाकर मातृत्व सुख मिले ये आम बात है, कोई और तकलीफें सहे हमारी सेहत और सुन्दरता ज्यों की त्यों बनी रहे और मातृत्व सुख भी पा जायें तो ये खास बात है... हम करें अपराध पुलिस आये पकड़्कर ले जाये ये आम बात है, हम करें अपराध और हम ही पुलिस बुलायें अपनी जगह किसी और को पकड़वायें तो ये खास बात है... हम पड़ें बीमार डॉक्टर वसूले भारी फीस और तब हो हमारा इलाज ये आम बात है, हम पड़ें बीमार कोई और बिल चुकाये हमारी एक किडनी डॉक्टर चुपके से उसे थमाये तो ये खास बात है... अदालत में चले मुकदमा सारे सबूत गवाह जुटायें केस जीत जायें ये आम बात है, न गवाह न सबूत लायें सीधे जज को पटायें केस जीत जायें तो ये खास बात है.... हमेशा करें अच्छे काम हमेशा तारीफ पायें चर्चित हो जायें ये आम बात है, हमेशा करें उल्टे सीधे काम हमेशा खिंचाई करायें और खूब चर्चा में आयें तो ये खास बात है.... अब आप करें फैसला बनना है आम या खास, पर इतना जान लीजिये कि कमजोर पड़ता दिख रहा अब 'देसी' च्यवनप्रास... - विशाल चर्चित

बुधवार, जून 21, 2017

अगर मेरा नशा उतरा....


शनिवार, जून 17, 2017

मानो तो मामूली सिक्का हो जाता है हजारों का...

जिधर देखो उधरहै दुख ही दुख,
जिसे देखो वही
है दुखी-है निराश,
क्योंकि उन्हें
नहीं आता सुखी होना,
उन्हें लगता है कि
गाड़ी-बंगला और
करोड़ों की कमाई को ही
कहते हैं सुखी होना...

लेकिन यदि ऐसा होता तो
नहीं दिखती मुस्कान कभी
किसी भी गरीब के चेहरे पर,
नहीं दिखते आंसू कभी
किसी अमीर के चेहरे पर...

लोग दुखी हैं क्योंकि
उनको चाहिये सब कुछ
अपनी ही पसंद का
अपने ही हिसाब से,
उससे कम पर तो
नहीं होना है कभी खुश
नहीं होना है कभी संतुष्ट...

सब कुछ छीन लेना है
सब कुछ झपट लेना है
सब कुछ हथिया लेना है,
ईश्वर-खुदा-गॉड या ऊपरवाला
तो जैसे है सिर्फ
आदेश सुनने के लिये ही,
ये आदेश होता है
पूजा के रूप में या
इबादत के रूप में
प्रार्थना के रूप में...

यदि हो गया अपने मन का
तो खुश कि देखा?
मैंने कर दिखाया न?!
मैं ये - मैं वो...
और जब नहीं होता
अपने मन का तब
शुरू होता है रोना
दूसरों की गलती पर
अपने भाग्य पर
या फिर ईश्वर पर...

लो सुनो एक उपाय
करके देखो एक प्रयोग
सुखी जीवन के लिये
शांतिमय हर पल के लिये
हमेशा मुस्कुराने के लिये...

सच में स्वीकार लो
ईश्वर की सत्ता को,
सीख लो स्वीकारना
अपनी हार को,
मान लो कि
तुम्हें कुछ नहीं है पता,
मान लो कि
नहीं है कुछ भी
तुम्हारे हाथ में और
छोड़ दो तर्क करना...

फिर करो महसूस
ईश्वर को-प्रकृति को
अपने भाग्य को
सुख को-सुकून को...

सार ये है कि -
सुख-दुःख है सब झूठी बातें
सारा खेल विचारों का,
मानो तो मामूली सिक्का
हो जाता है हजारों का...

- विशाल चर्चित

शनिवार, मई 06, 2017

ओ मेरे जीवन तू पा मृत्यु की जीवंतता...


ना हर्ष हो न विषाद हो
ना द्वेष हो न तो राग हो,
ओ हृदय, हो तू भाव शून्य
तेरा शून्य प्रत्येक ही भाग हो...

ना स्वप्न हो न हो कल्पना
ना योजना न तो सर्जना,
हो मेरे मस्तिष्क सुप्त
हो सकल स्मृति ही लुप्त...

ना लक्ष्य हो न तो यात्रा
ना भार हो न तो मात्रा,
मेरी इंद्रियों, सब शिथिल हो
मेरे रोम रोम शिथिल हो...

ना श्वास हो न स्पंदना
ना ऊष्मा उत्सर्जना,
ओ मेरे जीवन, तू पा
मृत्यु की जीवंतता...

- विशाल चर्चित

शुक्रवार, मई 05, 2017

ख्वाब में ही सही रोज़ आया करो....

ख्वाब में ही सही रोज़ आया करो
मेरी रातों को रौशन बनाया करो

ये मुहब्बत यूँ ही रोज़ बढती रहे
इस कदर धड़कनें तुम बढ़ाया करो

मैं यहाँ तुम वहाँ दूरियां हैं बहुत
अपनी बातों से इनको मिटाया करो

मुझको प्यारा तुम्हारा है गुस्सा बहुत
इसलिए तुम कभी रूठ जाया करो

मुझे घेरें कभी मायूसियां जो अगर
बच्चों सी दिल को तुम गुदगुदाया करो

तुमको मालूम है लोग जल जाते हैं
नाम मेरा लबों पे न लाया करो

जुड़ गयी ज़िन्दगी इसलिए तुम भी अब
नाम के आगे चर्चित लगाया करो

- VISHAAL CHARCHCHIT

गुरुवार, मई 04, 2017

बच्चा नहीं चच्चा !!!!


जच्चा के पेट का जब
हुआ अल्ट्रासाउन्ड,
नर्स हिल गयी
अस्पताल हिल गया
देखा जब पेट के
अन्दर का बैकग्राउन्ड...

मां खुद देख रही थी
स्क्रीन पर आंखें फाड़,
जिसको समझी थी तिल
वो तो दिख रहा ताड़...

बच्चा नहीं ये चच्चा
दुनिया में आने से पहले ही
फेसबुक से यारी कर रहा,
अपने आने की खबर वाली
पोस्ट वाल पर जारी कर रहा...

बालक
क्या संकेत दे रहा है,
एक नये युग का सूत्रपात
किये दे रहा है...
मां बाप इस उम्र तक
जितना भी सीख पाये हैं,
लाल पेट में ही
वहां से आगे कदम बढ़ाये है...

सुनी होगी आप सबने
अभिमन्यु वाली कहानी,
मां की पेट में ही सीखा
चक्रव्यूह तोड़ डालना
अपने बाप की जुबानी...

ये किस्सा बहुत पुराना है
अब आया नया जमाना है
बच्चों के जरिये मां बाप को
अब अपना ज्ञान बढ़ाना है...

बच्चे स्कूल जाते हैं
न जाने क्या - क्या
सीख के आते हैं
और होम वर्क के जरिये
अपने मां बाप को सिखाते हैं,
लेकिन बात यहीं तक होती
तो कोई बात नहीं थी,
पर बात - बात पे अक्सर
अब तो उल्लू भी बनाते हैं...

इसलिये आंख खोल कर
होशो हवास में रहिये,
मां बाप बने रहना है तो
नया - नया सीखते रहिये,
वर्ना तो कल को केवल
पछताना रह जायेगा,
देखते ही देखते आपका बच्चा
आपका मां बाप बन जायेगा...

- विशान चर्चित

मंगलवार, मई 02, 2017

माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!


अब तक नहीं आयी
कहां तू लुकाई
भूख ने पेट में
हलचल मचाई
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

गयी जिस ओर
निगाह उस ओर
घर में तो जैसे
सन्नाटे का शोर
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

ये हरे भरे पत्ते
बैरी हैं लगते
कहते हैं मां गई
तेरी कलकत्ते
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

जल्दी से आओ
दाना ले आओ
इन सबके मुंह पे
ताला लगाओ
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

अब हम न मानेंगे
उड़ना भी जानेंगे
तेरे पीछे-पीछे हम
आसमान छानेंगे
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

- विशाल चर्चित