Wednesday, October 28, 2020

कुछ दोहे आज के हालात पर...

छप्पन व्यंजन खाय के,भरा पेट कर्राय
तब टीवी की खबर पर, 'देश प्रेम' चर्राय

नेता उल्लू साधते, आपन गाल बजाय
जनता देखय फायदा, बातन में आ जाय

जोड़-तोड़ बनि जाय जो, दोबारा सरकार
लूट-पाट होने लगे, बढ़ता भ्रष्टाचार

महंगाई जस जस बढ़ै, व्यापारी मुस्कायँ,
जैसे आवय आपदा, फौरन दाम बढ़ायँ

पत्रकारिता बिक गयी, कलम करे व्यापार
समाचार के दाम भी, माँग रहे अखबार

कामकाज को टारि के, बाबू गाल बजायँ
देश तरक्की कर रहा, सोचि सोचि मुस्कायँ

अब शिक्षा के नाम पर, शोबाजी भरपूर
टीमटाम तो बहुत है, शिक्षा कोसों दूर

- विशाल चर्चित

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14 comments:

  1. बहुत सुंदर। लाजवाब अभिव्यक्ति।

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  2. बहुत सटीक सामयिक प्रस्तुति

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 29.10.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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  4. सार्थक एवं प्रभावी । बहुत बढ़िया ।

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  5. सार्थक दोहे

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  6. हर एक दोहा सत्य से पर्दा उठाता हुआ....बहुत खूब !

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  7. वाह लाजवाब सार्थक सृजन।
    सुंदर दोहे।

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