Friday, August 15, 2014

सोचें कि कहीं अति तो नही हो रही स्वतंत्र की....


हमारा स्वतंत्रता दिवस
आयु के अरसठवें पड़ाव पर,
पूर्णतया प्रौढ़ और परिपक्व...
आरंभ में सीखा कि
कैसे जियें - कैसे रहें
स्वतंत्रता के साथ
क्योंकि तब थी
गरीबी - अशिक्षा 
और बेरोजगारी की लाचारी,
अधिकांश आवश्यकताओं के लिये
विकसित देशों के आगे हाथ बांधे
उनकी हां में हां मिलाते
उनसे अपना मजाक उड़वाते खड़े
कुछ ऐसा था हमारा बचपन...
फिर आया वो समय भी जब
हमने थोड़ा विकास किया
थोड़ी सुख - सुविधायें देखी
अपने पैर पर खड़े होकर
स्वतंत्रता के यौवन को अनुभव किया...
और अब प्रौढ़ावस्था में,
गरीबी से अमीरी के 
दरवाजे पर दस्तक देते हुए,
विश्व के प्रमुख प्रतिष्ठित देशों 
की सूची में पहुंच कर 
गर्वान्वित
 अनुभव करते हुए,
एक बड़ा बाजार बनकर
सभी प्रमुख देशों की
आवश्यकता बनते हुए,
सभी संसाधनों से लैस
संचार माध्यमों के जरिये
चहुं ओर व्याप्त होते हुए...
आइये सोचें कि कहीं अब
अति स्वतंत्र तो नहीं होने लगे?!
कुछ भी कह देने के लिये स्वतंत्र?!
कुछ भी कर देने के लिये स्वतंत्र?!
नियम - कानूनों में अपनी सुविधानुसार
फेर बदल कर देने के लिये स्वतंत्र?!
येन-केन-प्रकारेण धन एवं सम्मान के लिये स्वतंत्र?!
कोई तर्क देकर भ्रष्टाचार को सही बता रहा
कोई तर्क देकर बलात्कार को सही बता रहा
कोई तर्क देकर अन्याय को सही बता रहा
कहीं ये अति शिक्षा तो नहीं ?!
पता है कि अधिकांश लोगों के पास
समय नहीं है इन विषयों पर सोचने का
यहां तक कि पढ़ने का भी
फिर भी एक आशा - एक विश्वास कि
कुछ लोग है जो इन पर 
सोचते भी हैं- समझते भी हैं और
एक ठोस विचार भी रखते हैं...
बाकी अन्य लोगों के लिये
इन सब फालतू कार्यों के लिये
समय नहीं है
बधाई दो - बधाई लो 
जय हिन्द - वंदे मातरम बोलो
और आगे बढ़ो....

इसलिये -

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई
जय हिन्द - वंदे मातरम !!!

- विशाल चर्चित

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (16-08-2014) को “आजादी की वर्षगाँठ” (चर्चा अंक-1707) पर भी होगी।
    --
    हमारी स्वतन्त्रता और एकता अक्षुण्ण रहे।
    स्वतन्त्रता दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आपका हदय से आभारी हूं सर जी !!!!

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