Monday, July 16, 2012

आ हा हा हा क्या बात क्या बात - क्या बात....


बाहर ठंडी - ठंडी पवन
ऊपर से रिमझिम बरसात,
सामने हो एक भरी प्लेट
गरम पकोड़े चटनी साथ
आ हा हा हा क्या बात
क्या बात - क्या बात....
बगल में बैठी जाने जानां
अपने हाथ से हमें खिलायें
वो भी बड़ी अदा के साथ,
आ हा हा हा क्या बात
क्या बात - क्या बात.... 
ख़तम पकौड़े चाय गरम
लौंग इलायची अदरक वाली
एक ही कप हम दोनों साथ,
आ हा हा हा क्या बात
क्या बात - क्या बात....
दौर शुरू हो अब प्यार का
दोनों के दिल में बहार का 
थोड़ी चुहलबाजी के साथ,
आ हा हा हा क्या बात
क्या बात - क्या बात....
इसी बीच जो नींद आ जाए
सुन्दर सपनों में खो जाएँ
जिन्हें सच करेंगे हम साथ,
आ हा हा हा क्या बात
क्या बात - क्या बात.... 
कुछ ऐसा ही हर कोई चाहे 
ये थी सबके दिल की बात
अगर भा गयी सच में सबको 
मेरी ये रिमझिम सौगात,
आ हा हा हा क्या बात
क्या बात - क्या बात.... 

- VISHAAL CHARCHCHIT

1 comment:

  1. ओहो ... क्या बात है ... क्यों मुह में पानी ला रहे है ... मस्त रचना है ...

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