शुक्रवार, जुलाई 28, 2017

चीनी सालों होश में आओ...

चीनी सालों होश में आओ वर्ना होश में ला देंगे
तेरी माँ की माँ को भी हम नानी याद दिला देंगे

गया ज़माना बात-बात पर हमको आँख दिखाते थे
और हिन्दुस्तानी हम सीधे सादे चुपचाप रह जाते थे

अब तो आँख दिखा के देखो सीधे आँख फोड़ देंगे
अग्नि पृथ्वी सारी मिसाइलें बीजिंग तक घुसेड देंगे

छोडो अरुणांचल-सिक्किम पर घडी-घडी दावा करना
जब देखो अपने धन-बल का रोज़ - रोज़ हौवा करना

अच्छा होगा इज्ज़त से हिमालय के उस पार ही रहना
अच्छा होगा अपनी छोटी सी चार फुटी औकात में रहना

वर्ना यहीं से बैठे - बैठे हम खोपड़ी तुम्हारी खोल देंगे
तुम चीनियों को हम शरबत जैसा पानी में घोल देंगे

इतराते हो जिस दीवार पे मिनटों में ध्वस्त हो जायेगी
हिरोशिमा-नागासाकी से भी भयानक तबाही हो जायेगी

पूरी दुनिया में अब भारत की शान का परचम लहराता है
बाप तुम्हारा अमरीका भी अब यहाँ आके दम हिलाता है

ताकतवर होने पर भी हम छोटे देशों को नहीं डराते हैं
शांतिप्रियता और भाईचारे के लिए हम "चर्चित" कहलाते हैं

- विशाल चर्चित

गुरुवार, जुलाई 20, 2017

सजदा हवा करे, मौसम नमाज हो...

हम भी वजू करें, तुम भी वजू करो
सजदा हवा करे, मौसम नमाज हो

HUM BHI WAJU KAREIN
TUM BHI WAJU KARO
SAJDA HAWAA KARE
MAUSAM NAMAAJ HO

- Vishaal Charchchit

गुरुवार, जून 29, 2017

दरिया रहा कश्ती रही लेकिन सफर तन्हा रहा...


दरिया रहा कश्ती रही लेकिन सफर तन्हा रहा
हम भी वहीं तुम भी वहीं झगड़ा मगर चलता रहा

साहिल मिला मंजिल मिली खुशियां मनीं लेकिन अलग
खामोश हम खामोश तुम फिर भी बड़ा जलसा रहा

सोचा तो था हमने, न आयेंगे फरेबे इश्क में
बेइश्क दिल जब तक रहा इस अक्ल पर परदा रहा

शिकवे हुए दिल भी दुखा दूरी हुई दोनों में पर
हर बात में हो जिक्र उसका ये बड़ा चस्का रहा

छाया नशा जब इश्क का 'चर्चित' हुए कु्छ इस कदर
गर ख्वाब में उनसे मिले तो शहर भर चर्चा रहा

- विशाल चर्चित

बुधवार, जून 28, 2017

प्रेम का हो एक नया श्रृंगार अब...

आ प्रिये कि हो नयी 
         कुछ कल्पना - कुछ सर्जना,
              आ प्रिये कि प्रेम का हो 
                    एक नया श्रृंगार अब.....

      तू रहे ना तू कि मैं ना 
           मैं रहूँ अब यूं अलग
                 हो विलय अब तन से तन का 
                       मन से मन का - प्राणों का,
                             आ कि एक - एक स्वप्न मन का
                                   हो सभी साकार अब....

          अधर से अधरों का मिलना
                 साँसों से हो सांस का,
                         हो सभी दुखों का मिटना
                               और सभी अवसाद का,
                                       आ करें हम ऊर्जा का
                                             एक नया संचार अब.....

        चल मिलें मिलकर छुएं
             हम प्रेम का चरमोत्कर्ष,
                   चल करें अनुभव सभी
                         आनंद एवं सारे हर्ष,
                               आ चलें हम साथ मिलकर
                                     प्रेम के उस पार अब....

         ध्यान की ऐसी समाधि
             आ लगायें साथ मिल,
                   प्रेम की इस साधना से
                         ईश्वर भी जाए हिल,
                              आ करें ऐसा अलौकिक
                                   प्रेम का विस्तार अब....

                                 - VISHAAL CHARCHCHIT

मंगलवार, जून 27, 2017

तू जो साथ है.....


तू जो साथ है दिन - रात है मेरी ज़िन्दगी सौगात है
तू जो एक पल को भी दूर हो हर बात फिर बेबात है

तू बसा है जबसे निगाह में लगे हर तरफ मुझे रौशनी
तू जो रूठ जाये अगर कभी तो फिर अश्कों की बरसात है

तू दिल हुआ धड़कन हुआ मेरी साँसों की थिरकन हुआ
तू जो है तो है ये वजूद अब नहीं बेवजह कायनात है

तू उतर चूका है लकीर में मेरी हाथों की कुछ इस कदर
तू जो मोड़ ले अब मुंह अगर लगे लुट चुकी ये हयात है

तू जुड़ा उड़ीं ख़बरें कई अजी लो गया अब तो 'विशाल'
तू हिला नहीं मेरे साथ से तो ख़बर में अपना ये साथ है

- विशाल चर्चित