बुधवार, जनवरी 16, 2013

चर्चित दाना - चर्चित दाना.....



















चर्चित दाना - चर्चित दाना

छोड़ दो अब तुम खाना खाना...

महंगाई है चरम पे अपने 
शुरू करो अब चुगना दाना
बहुत खा चुके थाली भर भर
बहुत गा चुके गाना वाना....

आने वाला दिन ऐसा है 
खाना कम बस गोली खाना
ऐश की सारी चीज़ें होंगी
सेहत लेकिन ना ना ना ना....

आज नहीं एक दिन सोचोगे
अच्छा है पंछी बन जाना,
मानव जीवन बडा कठिन है
नींद में भी बस पाना - पाना....

चर्चित दाना - चर्चित दाना
छोड़ दो अब तुम खाना खाना....

- VISHAAL CHARCHCHIT

वक्त की लय पर चलो एक राग सुन लें...

















वक्त की लय पर चलो

एक राग सुन लें

है बसंती रुत सुहानी
है बडी चंचल पवन
है हृदय में भाव जागा
ख्वाब से भीगे नयन

आओ मन के मीत सा
एक साज चुन लें

तुम कहां खोये हुए हो
कौन धुन में हो मगन,
कौन सा ऐसा विषय है
कर रहे चिंतन-मनन

आओ हम तुम साथ मिल
एक आज बुन लें....

- VISHAAL CHARCHCHIT

मंगलवार, दिसंबर 04, 2012

जब से जागो तभी से सबेरा.....


















होता है कभी - कभी यूँ भी कि
इंसान बिना जाने - समझे
मान बैठता है दिल की बात,
पकड़ लेता है एक ऐसी राह जो
नहीं होती उसके लिए उपयुक्त
नहीं पहुँचती किसी मंजिल तक,
लेकिन चूंकि होता है एक जूनून
होते हैं ख्वाब जिनका पीछा करते
निकल जाता है बहुत दूर - बहुत आगे,
तब अचानक लगती है एक ठोकर,
बहुत तेज़ - बहुत ज़ोरदार कि
खुल जाती है जैसे उसकी आँख
हो जाता है अपनी गलती का एहसास,
लेकिन अब ?......क्या करे - क्या न करे
पीछे लौटे - आगे जाए - ठहर जाए
या फिर कोई नयी राह ली जाए......
अब टूट चुके होते हैं सारे ख्वाब
पूरी तरह से बुझ चुका होता है दिल
और हो चुका होता है एकदम निराश....
तभी एकाएक याद आती है उसे
बुजुर्गों से अक्सर ही सुनी हुई ये बात
कि जो होता है अच्छे के लिए होता है,
कुछ छूट जाने - कुछ खो जाने से
सब कुछ ख़त्म नहीं होता है.....
नहीं थी वो राह तुम्हारे लिए ठीक
अच्छा हुआ जो अभी लग गयी ठोकर
वर्ना आगे होती और ज्यादा तकलीफ,
उठो - खड़े होओ - और पकड़ो एक नयी राह,
अभी कुछ भी नहीं है बिगड़ा मत होओ निराश
क्योंकि जब से जागो तभी से सबेरा होता है......

- VISHAAL CHARCHCHIT

शुक्रवार, नवंबर 30, 2012

::::::::::।। ॐ रजनीकांताय नमः ।।::::::::::
















कोई भी हो प्रॉब्लम रजनीकांत - रजनीकांत
कैसी भी हो टेंशन रजनीकांत - रजनीकांत
याद करो हाजिर जो रजनीकांत - रजनीकांत
हर कला में माहिर जो रजनीकांत - रजनीकांत
भाई हो या डॉन हो रजनीकांत - रजनीकांत
धरती आसमान हो रजनीकांत - रजनीकांत
गन हो या बुलेट हो रजनीकांत - रजनीकांत
एफ 50 जेट हो रजनीकांत - रजनीकांत
एसपी हो डीएम हो रजनीकांत - रजनीकांत
सीएम हो पीएम हो रजनीकांत - रजनीकांत
ओबामा - ओसामा हो रजनीकांत - रजनीकांत
कोई भी गामा हो रजनीकांत - रजनीकांत
मेरा भी सपना है रजनीकांत - रजनीकांत
तुमको पूरा करना है रजनीकांत - रजनीकांत
देश में खुशहाली हो रजनीकांत - रजनीकांत
हर दिन दीवाली हो रजनीकांत - रजनीकांत
भ्रष्टाचार रोकना है रजनीकांत - रजनीकांत
दुश्मनों को ठोंकना है रजनीकांत - रजनीकांत
ना दुखी - ना गरीब रजनीकांत - रजनीकांत
सब के सब हों खुशनसीब रजनीकांत - रजनीकांत
पावर दो - पावर दो रजनीकांत - रजनीकांत
तुम तो सुपर पावर हो रजनीकांत - रजनीकांत
धगड़ - धगड़ - तगड - तगड रजनीकांत - रजनीकांत
यगण - मगण - जगण - तगण रजनीकांत - रजनीकांत
:::::::::::।। ॐ  रजनीकांताय नमः ।। :::::::::::::

- VISHAAL CHARCHCHIT

रविवार, नवंबर 25, 2012

हमेशा सोचते रहने की आदत.....

















 
किसी को बचपन से ही
    जब नहीं मिला हो
           आसानी से सब कुछ,
                जब करनी पडी हो
                     एक - एक चीज़ को
                            पाने के लिए मशक्कत....
 जब रखना पडा हो
     एक - एक कदम
           हमेशा फूंक - फूंक कर,
                   जब सोचना पडा हो
                          कई - कई बार किसी से
                                कुछ कहने से पहले,
                                    जब जिन्दगी दिखाती रहो
                                              एक पल को रोशनी
                                                 दूसरे पल गहरा अन्धकार....
जब चलना पड रहा हो
    हमेशा ऊबड़ - खाबड़ रास्तों से,
         और पता नहीं हो कि
              अभी और कितना चलने के बाद
                    मिलेगी मनचाही मंजिल,
                         तो हो ही जाती है अक्सर
                               कुछ न कुछ सोचते रहने की आदत....
क्योंकि ये सोच - ये विचार
      ये सपने - ये खयाली पुलाव ही तो हैं
            देते रहते है अक्सर आगे बढ़ते रहने
                    सतत चलते रहने का हौसला,
                         जो अक्सर बहलाते रहते है दिल,
                               और दिल ?
दिल ही तो है जो किसी इंजन की तरह
     खींचता रहता है ज़िंदगी की गाडी को,
            इसलिए बहुत जरूरी है दिल का
                  तमाम विचारों - तमाम सपनों के
                         पेट्रोल से लबालब भरा रहना .....

                              - VISHAAL CHARCHCHIT

बुधवार, नवंबर 14, 2012

सोनू - मोनू - पिंकू - गुड्डू आओ मनाएं बाल दिवस.....






















बाल दिवस है बाल दिवस
    हम सबका है बाल दिवस,
             सोनू - मोनू - पिंकू - गुड्डू
                    आओ मनाएं बाल दिवस....
कागज़ की एक नाव बनाएं
    तितली रानी को बैठाएं,
         नदी किनारे संग संग उसके
                आओ हम सब चलते जाएँ....
तितली उड़े आकाश में
   भगवान जी के पास में,
       भगवान जी से लाये मिठाई
           खा करके चलो करें पढ़ाई....
पढ़ना है जी जान से
    ताकि हिन्दुस्तान में,
          खूब बड़ा हो अपना नाम
               खूब अच्छा हो अपना काम....
काम से पापा मम्मी खुश
      काम से सारे टीचर खुश,
           सारे खुश हो खुशी मनाएं
                 बड़े भी सब बच्चे हो जाएँ.....
बच्चों का हो ये संसार
     बचपन की हो जय जयकार,
          ना चालाकी - ना मक्कारी
                  ना ही कोई दुनियादारी.......
दुनिया पूरी हो बच्चों की
    केवल हो सीधे - सच्चों की,
         सच्चे दिल की ये आवाज
              आओ धूम मचाएं आज.....

               - VISHAAL CHARCHCHIT

मंगलवार, नवंबर 13, 2012

बाबू जी की दीवाली........


    और सुनाएं बाबू जी
         दीवाली मना रहे हैं?!
                सबकुछ नया - नया और
                       हाई टेक बना रहे हैं?!.....
  देसी दीये पुराने लगते
       चाइनीज झालर लाये हैं,
             लक्ष्मी गणेश की मूर्ति भी
                    चाइना से ही मंगवाए हैं....
  देश हमारा बड़ा हो रहा
        पता आपसे चलता है,
              क्योंकि हर साल दीवाली पर
                      बजट आपका बढ़ता है.....
   पटाखे कई हजार के
       इस बार भी लाये हैं न?!
            पूरा मोहल्ला हिलाने का
                 इस बार भी कार्यक्रम बनाए हैं न ?!
  अच्छा, एक राज की बात
      क्या आप मुझे बताएँगे?
            कितना सोना - कितना रुपया
                  इस बार लक्ष्मी जी को चढ़ाएंगे?
  सच कहें तो आपको देख कर
       बाबू जी हम खुश हो लेते हैं,
           और आपकी दीवाली को ही हम
                अपनी दीवाली समझ लेते हैं....
  वर्ना हम गरीब क्या जानें
        कि दीवाली क्या होती है,
              रोटी - दाल - दीये के अलावा
                   खुशहाली क्या होती है....
  लक्ष्मी जी को प्रसन्न कर सकें
       अपनी इतनी औकात कहाँ,
            आपकी तरह सोना - रुपया
                 और महंगे प्रसाद कहाँ....
  महंगाई ने हिला दिया है
       रोम - रोम तक बाबू जी,
              जाने कब तक और बचेंगे
                    हम गरीब अब बाबू जी....

                       - VISHAAL CHARCHCHIT