गुरुवार, जुलाई 20, 2017

सजदा हवा करे, मौसम नमाज हो...

हम भी वजू करें, तुम भी वजू करो
सजदा हवा करे, मौसम नमाज हो

HUM BHI WAJU KAREIN
TUM BHI WAJU KARO
SAJDA HAWAA KARE
MAUSAM NAMAAJ HO

- Vishaal Charchchit

गुरुवार, जून 29, 2017

दरिया रहा कश्ती रही लेकिन सफर तन्हा रहा...


दरिया रहा कश्ती रही लेकिन सफर तन्हा रहा
हम भी वहीं तुम भी वहीं झगड़ा मगर चलता रहा

साहिल मिला मंजिल मिली खुशियां मनीं लेकिन अलग
खामोश हम खामोश तुम फिर भी बड़ा जलसा रहा

सोचा तो था हमने, न आयेंगे फरेबे इश्क में
बेइश्क दिल जब तक रहा इस अक्ल पर परदा रहा

शिकवे हुए दिल भी दुखा दूरी हुई दोनों में पर
हर बात में हो जिक्र उसका ये बड़ा चस्का रहा

छाया नशा जब इश्क का 'चर्चित' हुए कु्छ इस कदर
गर ख्वाब में उनसे मिले तो शहर भर चर्चा रहा

- विशाल चर्चित

बुधवार, जून 28, 2017

प्रेम का हो एक नया श्रृंगार अब...

आ प्रिये कि हो नयी 
         कुछ कल्पना - कुछ सर्जना,
              आ प्रिये कि प्रेम का हो 
                    एक नया श्रृंगार अब.....

      तू रहे ना तू कि मैं ना 
           मैं रहूँ अब यूं अलग
                 हो विलय अब तन से तन का 
                       मन से मन का - प्राणों का,
                             आ कि एक - एक स्वप्न मन का
                                   हो सभी साकार अब....

          अधर से अधरों का मिलना
                 साँसों से हो सांस का,
                         हो सभी दुखों का मिटना
                               और सभी अवसाद का,
                                       आ करें हम ऊर्जा का
                                             एक नया संचार अब.....

        चल मिलें मिलकर छुएं
             हम प्रेम का चरमोत्कर्ष,
                   चल करें अनुभव सभी
                         आनंद एवं सारे हर्ष,
                               आ चलें हम साथ मिलकर
                                     प्रेम के उस पार अब....

         ध्यान की ऐसी समाधि
             आ लगायें साथ मिल,
                   प्रेम की इस साधना से
                         ईश्वर भी जाए हिल,
                              आ करें ऐसा अलौकिक
                                   प्रेम का विस्तार अब....

                                 - VISHAAL CHARCHCHIT

मंगलवार, जून 27, 2017

तू जो साथ है.....


तू जो साथ है दिन - रात है मेरी ज़िन्दगी सौगात है
तू जो एक पल को भी दूर हो हर बात फिर बेबात है

तू बसा है जबसे निगाह में लगे हर तरफ मुझे रौशनी
तू जो रूठ जाये अगर कभी तो फिर अश्कों की बरसात है

तू दिल हुआ धड़कन हुआ मेरी साँसों की थिरकन हुआ
तू जो है तो है ये वजूद अब नहीं बेवजह कायनात है

तू उतर चूका है लकीर में मेरी हाथों की कुछ इस कदर
तू जो मोड़ ले अब मुंह अगर लगे लुट चुकी ये हयात है

तू जुड़ा उड़ीं ख़बरें कई अजी लो गया अब तो 'विशाल'
तू हिला नहीं मेरे साथ से तो ख़बर में अपना ये साथ है

- विशाल चर्चित

रविवार, जून 25, 2017

अपनी गलती पे भी ध्यान देते रहो...


होता है कई बार ऐसा
जब हम कहते कुछ हैं
लोग समझते कुछ हैं,
होता है कई बार ऐसा
जब हम लिखते कुछ हैं
लोग पढ़ते कुछ हैं,
होता है कई बार ऐसा
जब हम दिखाते कुछ हैं
और लोगों को दिखता कुछ है...

होता है इसका परिणाम ये कि-
नहीं मिलता अपेक्षित प्रतिसाद
नहीं मिलता अपेक्षित उत्तर
नहीं मिलती अपेक्षित प्रशंसा...

और हम संतुष्ट हो जाते हैं
ये सोचकर कि -
लोगों में समझ ही नहीं है
लोगों के खराब हो गये हैं कान
लोगों की खराब हो गयी हैं आँखें...

कभी ये नहीं सोचते कि -
हमारे कहने में ही रह गयी थी
हमसे ही हो गयी थी चूक
हमारा लिखा हुआ ही नहीं था सटीक
हमने दिखाया ही था गलत...

इसीतरह से विश्वास और भरोसा है
जब हम लगा बैठते हैं
आसानी से अपनों पर आरोप कि -
आपको मुझपर विश्वास नहीं है?
आप मुझपर शक कर रहे?
आपको मुझपर संदेह है?

कभी कोशिश भी नहीं करते
ये सोचने की कि -
क्यों टूटा उनका विश्वास
क्यों हुआ उनको हम पर शक
क्यों लगता है उन्हें
हमारा हर व्यवहार ही संदिग्ध...

क्या किया जाये
ईश्वर देता ही नहीं है
सबको इतना आत्मज्ञान
सबको इतना विवेक
कि कर सकें अपनी हर बात
हर व्यवहार की विवेचना
कर सकें अपना आत्ममंथन...

और यही है
अधिकांश दुखों का सार,
अधिकांश कलह-क्लेश का कारण
अधिकांश रिश्तों में विघटन की वजह...

क्योंकि -
सही हो सही भी दिखो तो सही
सच्चे हो सच्चे हरदम रहो तो सही
सच है तो सच को दिखाया करो
गलतफहमियाँ रिश्तों में मत बढ़ाया करो
अपनी गलती पे भी ध्यान देते रहो
दूसरों की सदा मत दिखाया करो...

-विशाल चर्चित