विशाल सिंह (Vishaal Singh)
रविवार, अप्रैल 30, 2017

शुभ प्रभात की शुभ ये किरणें....

›
2 टिप्‍पणियां:
शनिवार, अप्रैल 15, 2017

बुझे चराग जले हैं जो इस बहाने से...

›
बुझे चराग जले हैं जो इस बहाने से बहुत सुकून मिला है तेरे फिर आने से बहुत दिनों से अंधेरों में था सफर दिल का इक आफताब के बेवक्त डूब...
2 टिप्‍पणियां:
रविवार, अप्रैल 02, 2017

तब ध्यान करो प्रकृति की तरफ...

›
चहुँ ओर दिखे अंधियारा जब सूझे न कहीं गलियारा जब, जब दुखों से घिर जाओ तुम जब चैन कहीं ना पाओ तुम... मन व्याकुल सा - तन व्याकुल सा जीवन ही लग...
3 टिप्‍पणियां:
रविवार, मार्च 19, 2017

दोनों की तूफानी शैली बड़ा बवंडर लायेगी...

›
सभी विरोधी परेशान थे एक अकेले मोदी से, अब बेचारों का क्या होगा कैसे निपटेंगे योगी से... दोनों की तूफानी शैली बड़ा बवंडर लायेगी, चोर-उ...
सोमवार, मार्च 13, 2017

चिमटा चला के मारा, बेलन घुमा के मारा...

›
चिमटा चला के मारा, बेलन घुमा के मारा फिर भी बचे रहे तो, भूखा सुला के मारा बरसों से चल रहा है, दहशत का सिलसिला ये बीवी ने जिंदगी को, दोजख बन...
1 टिप्पणी:

दुष्ट ने है छोड़ दिया बीपी बढ़ाय के...

›
1 टिप्पणी:

जोगीरा सारारारारा - जोगीरा सारारारारा...

›
हमने फेंका गुब्बारा है भरके कई रंग आओ होली खेलें दोस्तों शुभकामना के संग जोगीरा सारारारारा - जोगीरा सारारारारा...... खुशियों ...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरा परिचय

मेरी फ़ोटो
विशाल सिंह (Vishaal Singh)
Mumbai, Maharashtra, India
हिन्दी कॉपीराइटर, लेखक व कवि (व्यंग्य) तथा शायर
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.