विशाल सिंह (Vishaal Singh)
रविवार, अक्टूबर 09, 2016

चीनी सालों होश में आओ....

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चीनी सालों होश में आओ वर्ना होश में ला देंगे तेरी माँ की माँ को भी हम नानी याद दिला देंगे गया ज़माना बात-बात पर हमको आँख दिखाते थे ...
गुरुवार, अक्टूबर 06, 2016

जिनके हाथ सेकते हैं गोलियों से रोटियाँ...

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1 टिप्पणी:
रविवार, अक्टूबर 02, 2016

गांधी जी एवं शास्त्री जी के जन्मदिन पर....

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शनिवार, अक्टूबर 01, 2016

कुछ बातें आज के हालात पर.....

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- मत भूलें कि हम हिंदू - मुस्लिम या भारतीय - पाकिस्तानी होने से पहले मनुष्य हैं।  - मनुष्य का प्रथम धर्म है मानवता एवं नैतिकता, जो कि...
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शनिवार, सितंबर 17, 2016

वहां महफिल बहुत है...

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2 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, अगस्त 25, 2016

हे माखन के चोर तुम्हारा स्वागत है...

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हे माखन के चोर तुम्हारा स्वागत है हे राधा चितचोर तुम्हारा स्वागत है आओ लाओ सतयुग त्रेता द्वापर तुम ये कलियुग घनघोर तुम्हारा स्वा...
4 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, अगस्त 18, 2016

ये राखी के धागे........

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क्या अजीब खेल हैं ज़िंदगी के कि एक ही कोख से जन्म लेते हैं वर्षों एक छत के नीचे साथ रहते हैं लड़ते हैं - झगड़ते हैं - रूठते हैं - मनाते हैं...
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विशाल सिंह (Vishaal Singh)
Mumbai, Maharashtra, India
हिन्दी कॉपीराइटर, लेखक व कवि (व्यंग्य) तथा शायर
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