विशाल सिंह (Vishaal Singh)
रविवार, जून 26, 2016

ईश्वर देखो बस्ता लेकर...

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सारे कहते बच्चे ईश्वर ईश्वर देखो बस्ता लेकर, जाने की तैयारी में है विद्यालय मुस्कान है लेकर... नन्हे-नन्हे हाथों में अब नन्ही-नन्ही पुस्तक ...
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मंगलवार, मार्च 08, 2016

महिला दिवस पर जीवनसंगिनी - अर्धांगिनी की शान में एक रचना...

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जीवनसंगिनी... ये एक शब्द मात्र नहीं बल्कि एक पूरा संसार है खुशियों का - खुशबुओं का एहसासों का - मिठासों का रिश्तों का - नातों का.... ...

महिला दिवस पर एक खास रचना...

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हे नारी तू सागर है... हे नारी तू सागर है जहां नदियाँ मिलतीं आकर हैं पुरुष समझता आधा - पौना कहे घरेलू गागर है... जिसने भाँप लिया रत्नो...

महिला दिवस पर...

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बुधवार, मार्च 02, 2016

तुमपर ही तो मरते हैं....

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1 टिप्पणी:
रविवार, फ़रवरी 28, 2016

एक बच्चे की भावनाओं को शब्द...

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इम्तहान खत्म पर टेंशनें बनी हुई, कुछ भी सूझता नहीं कि क्या करूं  क्या ना करूं, पापा मम्मी चाहते रात-ओ-दिन पढ़ूं-पढ़ूं लेकिन मे...
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बुधवार, फ़रवरी 24, 2016

मानो तो मामूली सिक्का हो जाता है हजारों का...

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जिधर देखो उधर है दुख ही दुख, जिसे देखो वही है दुखी-है निराश, क्योंकि उन्हें नहीं आता सुखी होना, उन्हें लगता है कि गाड़ी-बंगला और कर...
4 टिप्‍पणियां:
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विशाल सिंह (Vishaal Singh)
Mumbai, Maharashtra, India
हिन्दी कॉपीराइटर, लेखक व कवि (व्यंग्य) तथा शायर
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