विशाल सिंह (Vishaal Singh)
रविवार, फ़रवरी 28, 2016

एक बच्चे की भावनाओं को शब्द...

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इम्तहान खत्म पर टेंशनें बनी हुई, कुछ भी सूझता नहीं कि क्या करूं  क्या ना करूं, पापा मम्मी चाहते रात-ओ-दिन पढ़ूं-पढ़ूं लेकिन मे...
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बुधवार, फ़रवरी 24, 2016

मानो तो मामूली सिक्का हो जाता है हजारों का...

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जिधर देखो उधर है दुख ही दुख, जिसे देखो वही है दुखी-है निराश, क्योंकि उन्हें नहीं आता सुखी होना, उन्हें लगता है कि गाड़ी-बंगला और कर...
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रविवार, फ़रवरी 14, 2016

प्यार अगर हो तो जैसे दिल-जिस्म का...

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प्यार, अगर हो तो हो चौबीसों घंटे का हो पूरे महीने का हो पूरे साल का हो जीवनभर का, जैसे होता है दिल और जिस्म का... जिस्म रह...
शनिवार, जनवरी 23, 2016

'हाय मेरा बच्चा रूठ गया'

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रविवार, जनवरी 03, 2016

ताकि बदलता रहे अक्सर हमारी जिन्दगी का जायका भी...

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रविवार, नवंबर 22, 2015

रास्ते में इम्तहान होता जरूर है...

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क्या हुआ जो कुछ मिला तो कुछ नहीं मिला, क्या हुआ जो कुछ खो गया तो कुछ छिन गया... देखो तो जरा गौर से रह गया होगा बहुत कुछ ...
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सोमवार, नवंबर 16, 2015

अरे जिन्दगी जाग जा - जाग जा...

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विशाल सिंह (Vishaal Singh)
Mumbai, Maharashtra, India
हिन्दी कॉपीराइटर, लेखक व कवि (व्यंग्य) तथा शायर
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