मंगलवार, अक्टूबर 13, 2015
जय मां अम्बे - जय जगदंबे...
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मंगलवार, सितंबर 22, 2015
मूल तो फिर मूल है पर ब्याज प्यारा है...
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रविवार, सितंबर 20, 2015
खर्च बेकार में क्यों रविवार हो...
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शनिवार, सितंबर 19, 2015
कथनी पर मत जाओ - करनी पर अक्ल लगाओ...
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शुक्रवार, सितंबर 18, 2015
हवायें भी दवा होंगी...
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शनिवार, सितंबर 05, 2015
हे माखन के चोर तुम्हारा स्वागत है...
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हे माखन के चोर तुम्हारा स्वागत है हे राधा चितचोर तुम्हारा स्वागत है आओ लाओ सतयुग त्रेता द्वापर तुम ये कलियुग घनघोर तुम्हारा स्वागत है......
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शुक्रवार, अगस्त 28, 2015
ये राखी के धागे.....
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क्या अजीब खेल हैं ज़िंदगी के कि एक ही कोख से जन्म लेते हैं वर्षों एक छत के नीचे साथ रहते हैं लड़ते हैं - झगड़ते हैं - रूठते हैं - मनाते हैं...
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