बुधवार, फ़रवरी 05, 2014
अगर मेरा नशा उतरा तो जीना भूल जाओगे.....
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सोमवार, जनवरी 20, 2014
तमाम तन्हा लोगों के नाम एक क्षणिका....
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सर्द मौसम है, गर्मागर्म पकौड़ों अदरक वाली चाय का ये वक्त है, पर नदारद हैं खनकती चूडियों वाले वे हाथ, शाम नहीं ये जहर की पुड़िया है, मौत यूं...
गुरुवार, जनवरी 02, 2014
नया साल - नयी नज्म
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सबकुछ न बदले पर इतना तो बदले, कि इन्सान अपनी ही फितरत न बदले... मौसम न बदले तो तासीर बदले, हवाओं का रुख और खुशबू तो बदले... जीना न बद...
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बुधवार, दिसंबर 11, 2013
लद रहा हिन्दुस्तान....
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गाय भैंस बकरी और लिये साइकिल लद रहा हिन्दुस्तान यहां वहां आये दिन रेल अपने बाप की पटरी उखाड़ लेव काहे की है मुश्किल घर मा बिछा...
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शनिवार, नवंबर 23, 2013
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रविवार, नवंबर 17, 2013
बहुत सुकून मिला है तेरे फिर आने से.....
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//// एक तरही गजल //// बुझे चराग जले हैं जो इस बहाने से बहुत सुकून मिला है तेरे फिर आने से बहुत दिनों से अंधेरों में था सफर दिल का इक आफताब...
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गुरुवार, नवंबर 07, 2013
दीवाली पर एक नवगीत
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क्यों रे दीपक क्यों जलता है, क्या तुझमें सपना पलता है...?! हम भी तो जलते हैं नित-नित हम भी तो गलते हैं नित-नित, पर तू क्यों रोशन रहता है......
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