बुधवार, दिसंबर 11, 2013
लद रहा हिन्दुस्तान....
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गाय भैंस बकरी और लिये साइकिल लद रहा हिन्दुस्तान यहां वहां आये दिन रेल अपने बाप की पटरी उखाड़ लेव काहे की है मुश्किल घर मा बिछा...
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शनिवार, नवंबर 23, 2013
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रविवार, नवंबर 17, 2013
बहुत सुकून मिला है तेरे फिर आने से.....
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//// एक तरही गजल //// बुझे चराग जले हैं जो इस बहाने से बहुत सुकून मिला है तेरे फिर आने से बहुत दिनों से अंधेरों में था सफर दिल का इक आफताब...
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गुरुवार, नवंबर 07, 2013
दीवाली पर एक नवगीत
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क्यों रे दीपक क्यों जलता है, क्या तुझमें सपना पलता है...?! हम भी तो जलते हैं नित-नित हम भी तो गलते हैं नित-नित, पर तू क्यों रोशन रहता है......
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दीयों, कितने अच्छे लगते हो......
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दीयों !!! कितने अच्छे लगते हो तुम जलते हुए इस तरह से जगमग - जगमग करते हुए...! अच्छा बताओ तो कहां से लाते हो भला इतने सुन्दर सी रोशनी?! क...
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शुक्रवार, अक्टूबर 25, 2013
रह गया मैं एक निरा भावुक इंसान...
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होता अगर मैं एक धुरंधर नेता तो सोचता कि वाह क्या दृश्य है गरीबी यहां भुखमरी यहां इसलिये अपनी सियासत यहां... होता अगर मैं मीडिया का खिलाड़ी...
रविवार, अक्टूबर 20, 2013
उड़ते हुए पल - छिन
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किताब के पन्नों के मानिंद उड़ते हुए जिन्दगी के पल छिन दे जाते हैं हमारे लिये कुछ यादो की खुशबुएं कुछ खुशियों की रोशनी औ...
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