विशाल सिंह (Vishaal Singh)
शनिवार, जून 22, 2013

सवाल है ईश्वर से.....

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और एक बार फिर से दिखा कुदरत का कहर एक बार फिर से दिखी हल्की सी एक झलक प्रलय की - कयामत की.... एक बार फिर से असहाय सा हुआ...
बुधवार, मई 29, 2013

क्या वजह क्या वजह कहर बरपा रहे......

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क्या वजह क्या वजह कहर बरपा रहे मेहरबां - मेहरबां से नजर आ रहे ये दुपट्टा कभी यूं सरकता न था आज हो क्या गया यूं ही सरका रहे चूडियां यूं तो ब...
बुधवार, मार्च 27, 2013

होली की शुभकामना के साथ........

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  चिमटा चला के मारा, बेलन घुमा के मारा फिर भी बचे रहे तो, भूखा सुला के मारा बरसों से चल रहा है, दहशत का सिलसिला ये बीवी ने जिंदगी ...
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शुक्रवार, फ़रवरी 22, 2013

आतंकवादी बम धमाकों पर...

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  न जाने कौन से हैं दिल जो दिलों के चीथड़े उड़ाते हैं, इधर उज़ड़ती हैं जिंदगियां और उधर ठहाके लगाते हैं.... वो आंखें हैं कि शीशा ह...
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बुधवार, जनवरी 16, 2013

चर्चित दाना - चर्चित दाना.....

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चर्चित दाना - चर्चित दाना छोड़ दो अब तुम खाना खाना... महंगाई है चरम पे अपने  शुरू करो अब चुगना दाना बहुत खा चुके थाली भर...
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वक्त की लय पर चलो एक राग सुन लें...

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वक्त की लय पर चलो एक राग सुन लें है बसंती रुत सुहानी है बडी चंचल पवन है हृदय में भाव जागा ख्वाब से भीगे नयन आओ मन के मीत स...
मंगलवार, दिसंबर 04, 2012

जब से जागो तभी से सबेरा.....

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होता है कभी - कभी यूँ भी कि इंसान बिना जाने - समझे मान बैठता है दिल की बात, पकड़ लेता है एक ऐसी राह जो नहीं होती उसके लिए...
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विशाल सिंह (Vishaal Singh)
Mumbai, Maharashtra, India
हिन्दी कॉपीराइटर, लेखक व कवि (व्यंग्य) तथा शायर
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