विशाल सिंह (Vishaal Singh)
शुक्रवार, नवंबर 25, 2011

ये मेरे कुछ शेर..........

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न जाने कितने आते हैं - न जाने कितने जाते हैं मगर कुछ लोग बहुत गहरा निशान छोड़ जाते हैं ---------------------------------------------------...
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मंगलवार, नवंबर 08, 2011

नशा....

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नशा.... किसी भी तरह का नहीं होता है अच्छा, किसी का - कभी भी नहीं करता है ये अच्छा.... आता है हमेशा  एक बहुत ही ख़ास  चमकदार रौशनी की ...
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शनिवार, नवंबर 05, 2011

इश्क लेने लगा जब से अंगड़ाइयां...

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इश्क लेने लगा जब से अंगड़ाइयां ये कदम खुद - ब - खुद डगमगाने लगे....
शुक्रवार, नवंबर 04, 2011

मुहब्बत जिंदाबाद...

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साजिशें होती रहेंगी साजिशों का क्या मुहब्बत थी मुहब्बत है रहेगी यूं ही जिंदाबाद...
गुरुवार, नवंबर 03, 2011

ये बेसबब सी दूरियां....

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दमियान-ए-इश्क और ये बेसबब सी दूरियां खुदाया तू बता क्या हैं तेरी मजबूरियां ?? वजह क्या है कि तू इतना सताता आशिकों को चलाता है भला क्यों इन द...
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अक्सर आम हो जाता है दिल का रास्ता अपना...

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बहुत अच्छा लगा एक ख़ास से है वास्ता अपना चुना तो हमने भी है ख़ास दिल का रास्ता अपना अब करें क्या हैं बड़े मजबूर हम इस यारबाजी से कि अक्सर आम...

इधर आंसू हमारे हैं, उधर जलवे तुम्हारे हैं...

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इधर आंसू हमारे हैं उधर जलवे तुम्हारे हैं कहीं बरसात का मौसम कहीं झिलमिल सितारे हैं... मयस्सर ही नहीं मिलना कि दूरी कम नहीं होती, कभी ल...
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विशाल सिंह (Vishaal Singh)
Mumbai, Maharashtra, India
हिन्दी कॉपीराइटर, लेखक व कवि (व्यंग्य) तथा शायर
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