सोमवार, अप्रैल 20, 2020

अफसरशाही और बाबूगीरी के जलवे...

alt='BEAUROCRACY'
सरकार जैसे देश का
दिमाग यानी कंट्रोलरूम,
तो अफसरशाही और
बाबूगीरी जैसे है हांथ-पांव...

सरकारी आदेश के बाद
होता है इन्हीं के हाथ में,
किसे देनी है धूप
तो किसे देनी है छाँव...

देश की तरक्की हो
या देश का कबाड़ा,
दोनों ही स्थितियाँ
इन्हीं की गुलाम हैं...

इनसे चलता सिस्टम
इनसे पलती जनता,
इनकी वजह से ही तो
ये सारा ताम-झाम है...

कोई भी हो स्थिति या
कोई भी हो परिस्थिति,
ये अपने खास हुनर से
सबकुछ सँभाल लेते हैं...

कब किसपर है गुर्राना
किसके सामने हिलानी है दुम,
जब-जहाँ हो जैसी जरूरत
ये हमेशा वैसी चाल लेते हैं...

जिससे भी हो फायदा
उससे रिश्ता निभाते हैं,
जो भी ना हो काम का
उसे हमेशा दौड़ाते हैं...

जो इनसे ले ले पंगा
या इनकी करे खिलाफत,
उसे मुस्कुराते हुए ये
चुपचाप निपटाते हैं...

जबतक भी रहें कुर्सी पर
लेन-देन चलता रहता है,
सबको - सबका हिस्सा
चुपचाप पहुँचता रहता है...

सत्ता हो या विपक्ष सबसे
तालमेल बिठाये रखते हैं,
सरकार हो चाहे जिसकी ये
सबसे हाथ मिलाये रखते हैं...

तमाम नियमों - कानूनों
और दाँवपेचों के सहारे,
सबकी कमियाँ ढूँढ़्कर
अदृश्य जाल बिछाये रखते हैं...

मीडिया हो या अदालत
सबको घुमाना जानते हैं,
फायदे के लिये झूठे-सच्चे
सबूत बनाना-मिटाना जानते हैं...

कब - कहाँ वादे करने हैं
कब - कहाँ मुकरना है,
जरूरत हो तो अपनी मां
तक की कसम खाना जानते हैं...

छॉटे-बड़े घोटाले हों या हो
अराजकता और भ्रष्टाचार,
ये सब में व्याप्त रहते पर
सरकारें बदनाम होती हैं...

देश में सूखा हो या बाढ़
या आये कोई भी आपदा,
इनके लिये हमेशा हरियाली
और रोज रंगीन शाम होती है...

आजादी के बाद देश अबतक
जहाँ तक भी पहुँचा या
नहीं पहुँच पाया है, सब
इनकी ही मेहरबानी है...

बड़ा मुश्किल है इनके रहते
पूरा सिस्टम ही बदल जाये,
सरकारों का क्या है वे तो
ऐसे ही आनी जानी हैं...

'चर्चित' का मतलब ये नहीं
कि सब अफसर ही ऐसे होते हैं,
कई तो देश पर मर-मिटने
गर्व करने लायक होते हैं...

पर क्या करें उन नालायकों
उन हरामखोरों का कि जो
देश के आस्तीन में छिपे
साँप कहने लायक होते हैं...

- विशाल चर्चित

#bureaucracy  #babudom  #अफसरशाही  #बाबूगीरी
#Corruption #भ्रष्टाचार

गुरुवार, अप्रैल 16, 2020

तो अब तक पक्का इमर्जेंसी लग गई होती...

alt='EMERGENCY'#Indira_Gandhi  #Modi  #Emergency  #coronavirus

गुरुवार, अप्रैल 09, 2020

अरे चीनियों - अरे राक्षसों जिसे पूजते उसी को खाते?

alt="CHINA CORONA"
तुमसे तो अच्छे हैं वनचर
कुछ उसूल उनको भी आते,
अरे चीनियों - अरे राक्षसों
जिसे पूजते उसी को खाते?

अजगर, चूहे - कुत्ते और
चमगादड़ सब भून डालते,
अरे दैत्यों कीड़े-मकोड़ों को 
भी क्यों तुम भक्ष डालते?

पाप तुम्हारे चरम पे पहुँचे
तभी कोरोना आया है,
जिसने पूरी दुनिया में
ये कोहराम मचाया है...

जो अपने ही देश की जनता
को विरोध पर मरवा डाले,
जिससे खतरा लगता उसको
इस दुनिया से उठवा डाले...

पाक जहाँ आतंकी पलते
तुम उससे हो हाथ मिलाते,
बम-बंदूकें-चारा देकर
तुम उनके आका कहलाते...

नकली माल बेचकर तुमने 
अब तक बहुत विश्व को लूटा,
सबको ये बीमारी दी अब
समझो घड़ा पाप का फूटा...

रूस-अमरीका से कुछ सीखो
जो करते हैं शान से करते,
तुम गीदड़ हो चोरी-चोरी
छुप-छुप करके हमला करते...

विश्व विजय की सोच तुम्हारी
कभी पूर्ण ना हो पायेगी,
जिस दुनिया ने सिर पे बिठाया
तुमको पैरों में लायेगी...

जहाँ कोरोना खत्म हुआ, तुम
खुद को खत्म हुआ अब समझो,
सबकी नजरें अब तुमपर हैं
सत्यानाश हुआ अब समझो...

ओ जिन्पिंग सुनो चर्चित की
तुम खतरे में सबसे पहले,
ऐसा ना हो चीन की जनता
तुम्हें निपटा दे सबसे पहले...

- विशाल चर्चित

#कोरोना  #coronavirus  #china_corona  #चीन_कोरोना  #कोरोना_कविता  #corona_poetry

शुक्रवार, मार्च 27, 2020

कॉरोना महामारी रूपी प्राकृतिक आपदा

कॉरोना की इस महामारी के समय प्रस्तुत है स्वाभाविक से भाव से भरी ये रचना...


चहुँ ओर दिखे अंधियारा जब
सूझे न कहीं गलियारा जब,
जब दुखों से घिर जाओ तुम
जब चैन कहीं ना पाओ तुम...

मन व्याकुल सा - तन व्याकुल सा
जीवन ही लगे शोकाकुल सा,
कोई मीत न हो - कोई प्रीत न हो
लगता जैसे कोई ईश न हो....

तब ध्यान करो प्रकृति की तरफ
ईश्वर की परम सुकृति की तरफ,
देखो तो भला सागर की लहर
उठती - गिरती जाती है ठहर...

अनुभव तो करो शीतलता का
पुरवाई की कोमलता का,
तुम नयन रंगो हरियाली से
पुष्पों की सुगन्धित लाली से....

तुम गान सुनो तो कोयल का
बहती सरिता की कलकल का,
पंछी करते क्या बात सुनो
कहता है क्या आकाश सुनो....

निकालोगे निराशा के तम से
निकलो तो भला अपने तन से,
है आस प्रकाश भरा जग में
रंग लो हर क्षण इसके रंग में....

जो बीत गया सो बीत गया
तम से निकला वो जीत गया,
उस जीत का तुम अनुभव तो करो
अनुभव तो करो - अनुभव तो करो...

- VISHAAL CHARCHCHIT

बुधवार, मार्च 25, 2020

प्रधानमंत्री मोदी जी के २१ दिन के पूर्णतया बंद के आह्वान पर



प्रधानमंत्री जी से -
--------------
- हमें आप पर - आपके नेतृत्व पर - आपके निर्णय पर पूर्णतः विश्वास है।
- हमें आपके हर निर्णय मान्य हैं।
- लेकिन आपसे निवेदन है कि आप राज्य सरकारों और प्रशासन से बात करके ये सुनिश्चित करें कि सभी के जरूरत की चीजें सुचारु रूप से मिलती रहें।
- आपसे निवेदन है कि आप राज्य सरकारों और प्रशासन से बात करके ये सुनिश्चित करें कि रोज कमाने खाने वाले गरीबों, मजदूरों, किसानों को राशन पानी मिलता रहे।
- आपसे निवेदन है कि आप राज्य सरकारों और प्रशासन से बात करके ये सुनिश्चित करें कि इस २१ दिन के दरम्यान या उसके बाद किसी की नौकरी न जाये, उसकी रोजी रोटी न छिने।

राज्य सरकारों से - प्रशासन से-
--------------------------------
- अब आपकी नैतिक जिम्मेदारियाँ बढ़ गयी हैं। ये मानकर चलें कि ये आपके लिये परीक्षा की घड़ी है। धैर्य से काम करें और सकारात्मक सोचें कि कुछ सोचकर ईश्वर ने आपको ये जिम्मेदारी दी है।
- झुंझलायें नहीं। घबरायें नहीं। गुस्से पर काबू रखें।
- जनता से पुलीसिया तरीके के बजाय जहाँ तक हो सके नरमी से पेश आयें। पर हाँ यदि जरूरी हो तो सख्ती भी करें।
- सभी मीडिया माध्यमों के जरिये जनता के संपर्क में रहें क्योंकि जनता अब पूरी तरह आपके ही भरोसे है।
- इस बीच, अफवाह, अपराध, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार के केसेज बढ़ सकते हैं, तो उनकी त्वरित जानकारी, जाँच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

विपक्षी दलों से - उनके नेताओं से -
-------------------------------------
- आप एक विपक्षी होने से ज्यादा ये सोचें कि पहले आप एक भारतीय हैं।
- देश की जनता के प्रति आपका भी कुछ दायित्व बनता है।
- आपका कर्तव्य केवल केन्द्र सरकार की खामियाँ गिनाना नहीं बल्कि सही राय देना, आगे बढ़कर उसका हाथ बँटाना भी है।
- ये समय आपसी वैमन्स्य - नीचा दिखाने का नहीं है। उसके लिये और भी बहुत से मौके आयेंगे। 
- इस समय आप द्वारा की गयी चालाकी भरी राजनीति से आम जनता का जीवन और भी मुश्किल हो सकता है, जो न तो देश के लिये ठीक है और न आपके भविष्य के लिये।

मीडिया से -
------------
- आप इस २१ दिन के लॉकडाउन में कृपा करके 'सास-बहू', 'सपना चौधरी की नृत्य', 'कवियॉ के हुड़्दंग', 'रावण की गुफा' या अन्य मनोरंजक कार्यक्रमों के बजाय ऐसे समाचारों पर जोर दें कि आम जनता को कोरोना के बारे में पूर्ण मार्गदर्शन मिले।
- लोगों रोजमर्रा की चीजें कब-कहाँ और कैसे मिलेंगी, इसका मार्गदर्शन आपकी नैतिक जिम्मेदारी है।
- लोगों को कोरोना संबंधी जाँच या इलाज कहाँ और कैसे मिलेगा, इसका मार्गदर्शन आपकी नैतिक जिम्मेदारी है।
- लोगों को सरकार से आर्थिक मदद कितनी और कैसे मिलेगी, इसका मार्गदर्शन आपकी नैतिक जिम्मेदारी है।
- इस बीच, अफवाह, अपराध, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार के केसेज बढ़ सकते हैं, तो इसकी कवरेज, उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना आपकी नैतिक जिम्मेदारी है।
- फालतू की डिबेट और बहस से कुछ नहीं हासिल होनेवाला, बेहतर हो कि अलग-अलग विशेषज्ञों के जरिये जनता को अलग-अलग जरूरी जानकारियाँ दी जायें।

प्राइवेट कंपनी मालिकों - व्यवसाइयों - उद्यमियों से -
-------------------------------------------------------
- ये समय आपके लिये एक अवसर की तरह है, कामकाज को ऑनलाइन करने के तरीके ढूँढने का।
- अपने कर्मचारियों को छुट्टी देकर उनका वेतन काटने के बजाय उनसे ऑनलाइन काम कराने के तरीके खोजें।
- सोचिये कि यदि कर्मचारियों को यदि एक लैपटॉप और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करा दिया जाये तो तमाम काम घर से भी हो सकते हैं।
- २१ दिन के लॉकडाउन से हुए नुकसान की भरपाई कर्मचारियों के वेतन काटकर करने के बजाय उनसे १-१ घंटे ओवरटाइम करा कर भी किया जा सकता है।
- इस खाली समय में आप अपने कारोबार को बढ़ाने के लिये मार्केट से जुड़े लोगों से, अपने क्लाइंटों और कस्टमरों से बातचीत और विचार-विमर्श के जरिये भी कर सकते हैं।
- इस खाली समय का उपयोग इंटरनेट के जरिये नयी चीजों पर शोध में भी किया जा सकता है।

आम जनता से -
-----------------
- ये मान कर चलिये कि प्रधानमंत्री जी ने ये २१ दिन बंद करने का फैसला बहुत सोच-समझकर, मजबूरी में, देश हित में, आपके हित में लिया है।
- तो आपको बस इतना करना है कि निजी स्वार्थों, जाति, धर्म. लिंग और दल से ऊपर उठकर देश हित में सोचना है। जान है तो जहान है।
- फालतू की बहस बाद में भी हो सकती है। कमियाँ गिनाना बाद में भी हो सकता है। लड़ने-झगड़ने के लिये और भी मौके आयेंगे। 
- ऐसा मान लीजिये कि ये एक युद्ध की स्थिति है, सरकार, सेना, प्रशासन, मीडिया, पूरा देश युद्ध की स्थिति में है। तो सोचिये कि ऐसे में आप क्या करेंगे?
- मोबाइल-इंटरनेट का प्रयोग फालतू की पंचायत, टाइम पास के बजाय लोगों की मदद, सरकार और प्रशासन की मदद में भी हो सकता है।
- आप अपने आस-पास फैल रहे अफवाहों, अपराधों, कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की सूचना मीडिया और पुलिस प्रशासन को दे सकते हैं।
- आपके लिये ये एक अच्छा समय है कुछ सीखने का, कुछ जानने का, कुछ नया करने का, आपके पास समय भी है, मोबाइल भी है, गूगल भी है, यू-ट्यूब भी है और तमाम सोशल मीडिया साइट्स भी हैं।
- इस समय को चाहें तो यूं ही गँवा दे, चाहें तो कुछ करके दिखा दें।

- विशाल चर्चित #coronavirus