Sunday, December 18, 2016

झगड़ना भी हो ईश्वर से तो घबराहट नहीं होती...

Saturday, December 17, 2016

नहीं कोई है साथ तो क्या तन्हा ही चुपचाप चलो...


Friday, December 16, 2016

बनो ऐसे कि मंजिल को हो इन्तजार तुम्हारे पहुंचने का...



बनो ऐसे कि
मंजिल को हो इन्तजार
तुम्हारे पहुंचने का,
और अगर ऐसा न हो तो
रह जाए एक मलाल उसे
तुम्हारे न पहुंचने का...


बनो ऐसे कि
हर महफिल में छाए रौनक
एक तुम्हारे आने से,
छा जाये हर तरफ मातम
एक तुम्हारे जाने से...

बनो ऐसे कि
बहुत बड़ी हो जाएं
तुम्हारे आस पास की
छोटी - छोटी खुशियां भी,
सिमट कर न के बराबर
रह जाये अपनी ही नहीं
दूसरों के गमों की दुनिया भी...

बनो ऐसे कि
हर रिश्ता तुमसे
जगमगाता सा नजर आये,
दिलो जान से निभाने पर भी
अगर कोई जाए तो पछताये कि
यार बहुत बड़ी गलती कर आये...

बनो ऐसे कि
हर हुनर - हर फन में
एक मिसाल हो जाओ,
तो देर किस बात की है
जो बीता सो बीता
अब तो होश में 'विशाल' हो जाओ...


- विशाल चर्चित

Wednesday, December 07, 2016

जिससे उपजे उसे सिखाते...

क्यों करें हम पूजा
क्यों करें हम आराधना
क्यों करें हम इबादत,
हो जाती है 
स्वतः ही ये तो
जब हम करते हैं
कोई अच्छा कार्य,
निभाते हैं जब
अपनों के प्रति 
मानवता के प्रति
नैतिकता के प्रति
अधिकांश कर्तव्य...
ईश्वर होता है 
प्रसन्न स्वतः ही
जब हम होते हैं प्रसन्न 
किसी की सहायता करके,
किसी के चेहरे पर
मधुर मुस्कान भरके...
ऊपर बैठा वो
हो जाता है निश्चिंत
जब हम नहीं होने देते
किसी स्वार्थी - अन्यायी 
और मक्कार के 
मनसूबों को सफल,
बचा लेते हैं कमजोरों
और असहायों को
किसी षडयंत्र से...
वर्ना सुनता और 
मुस्कुराता रहता है वो
'तुम ज्ञानी - हम अज्ञानी
तुमको नमामि हे अंतर्यामी
मेरे मालिक - मेरे आका
मेरे परवर दिगार....'
जिससे उपजे उसे सिखाते
सूरज को दीया दिखलाते
मन मे कुछ होठों पे कुछ ले
अच्छा उसका मन बहलाते...

- विशाल चर्चित