Sunday, February 26, 2012

भड़की हुई श्रीमती जी का "सन्डे प्रवचन"












काहे चिंता कर रहे ओ जी सन्डे लाल
इस सन्डे बनवा लिया दाढ़ी और बाल,
अगले सन्डे ले जाना बच्चों को तुम पिक्चर
वर्ना उलटे हो जायेंगे मंगल - राहू - शनिश्चर....

मंगल - राहू - शनिश्चर, पापी ग्रह सारे
मिलकर सिर के बाल साफ़ कर देंगे सारे,
ऊपर से फिर कई दिनों से पेन्डिंग है मेरा मेकअप
अगले सन्डे ब्यूटी पार्लर में चलो करवाओ चेकअप.....

चलो करवाओ चेकअप हमारी भी कोई इज्ज़त है 
पूरे मोहल्ले में सबसे फूटी हमारी ही किस्मत है,
ना पिकनिक को जाना  ना होटल में खाना 
जब देखो तब फेसबुकी दोस्तों से गप्प लड़ाना....

गप्प लड़ाना और मगन रहना कविताबाजी में
मोबाइल पर बिजी हमेशा रहते हाँ जी - ना जी में,
हफ्ते के ६ दिन करते ऑफिस में गधा - मजूरी
क्यों सन्डे को नानी मरती यहाँ करने में जी हुजूरी....

- VISHAAL CHARCHCHIT

Thursday, February 23, 2012

होते हैं कुछ ऐसे भी लोग.....

होते हैं कुछ लोग
घुट - घुट कर जीने के आदी
जो चाहते तो हैं बहुत कुछ
कहना - बताना, सुनना - सुनाना
पर रोक देता है हर बार
उनका घमंड - उनका अहंकार
आखिर कैसे कहें - कैसे झुकें
और रह जाते हैं तन्हा 
अक्सर इसी वजह से,
खुद से कहते - खुद की सुनते
खुद के खयालों का ताना बाना बुनते
उनका न होता है कोई रास्ता -
उनकी न होती है कोई मंजिल
बस चलते रहते हैं यूं ही
और जब आता है उन्हें होश
तो हो चुकी होती है बहुत देर
निकल चुके होते हैं बहुत दूर
छोड़ करके न जाने कितने पड़ाव 
न जाने कितने अपनों को
फिर रह जाता है उनके पास 
सिर्फ पछताना - हाथ मलना 
और खाली - खाली सी ज़िन्दगी.....

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जनसंख्या नियंत्रण अभियान पर ये रही "चर्चिती बांग"......

जनसंख्या के पीछे पड़े काहे धोकर हाथ
इसके बल पर करेंगे हम दुनिया पर राज
हम दुनिया पर राज बने बाजार बड़े हम
अमरीका यूरोप के सिर पर आज खड़े हम
कहा कि सुन लो खोल के सारे अपना -अपना कान
चलो हमारे कहने से नहीं बंद करो दूकान
बंद करो दूकान माल अपना ले जाओ
जाओ दादागीरी जाके अफ्रीका दिखलाओ
समझ गए वे नहीं गलेगी उनकी कोई दाल
इसीलिये आतंक पर अब बजा रहे हैं गाल
बजा रहे हैं गाल पाक में डेरा है डाला
उसकी आतंकी नाक में देखो दम कर डाला
कहते हैं "चर्चित" अभी तो शुरुवात है 
होने वाला पूरी दुनिया पर हमारा राज है....

Thursday, February 16, 2012

ये मेरे कुछ शेर.....

उन आँखों में शरारत की मस्ती क्यों जाएँ भला हम मयखाने
छाया वो नशा कि कब उतरे या वो जाने रब जाने,
हमने तो सभी कुछ छोड़ दिया दीन-ओ-दुनिया उनपे कब का
अब क्यों-कैसे-कितना जीना या वो जाने रब जाने.... 
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हमें मालूम है पक्का कि वो अपने नहीं होंगे
मगर दिल है बड़ा जिद्दी वहीँ अटका पडा अब भी 
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वो वादे किये तोडा किये खुद ही मुह मोड़ा किये
हम एकतरफा ही हमेशा उनसे दिल जोड़ा किये 
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दिया था दिल उन्हें हमने बड़े अरमान से लेकिन
उन्होंने हँसते - हँसते ही परिंदे सा उड़ा डाला..... 
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बड़ा नायाब है उसका सलीका मेजबानी का
कि जो आता है दर उसके दिल अपना छोड़ जाता है
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तू गुल है तो सही लेकिन महकना सीखना होगा
किसी के वास्ते खिलना ज़रूरी सीखना होगा,
कि कांटे को मुहब्बत है तभी यूं साथ होता है 
तुझे इसका भी दिल रखना ज़रूरी सीखना होगा 
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अब तो वो बुलाएं भी तो यकीन नहीं आएगा
दिल अब और उनकी बातों में नहीं आएगा,
माना कि बहुत नाज है उन्हें अपने हुनर पे 
पर आज नहीं तो कल उन्हें भी रोना आएगा 
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चलो अच्छा है कि तुमको कोई अब रास तो आया
जुबां पर अब किसी के वास्ते अलफ़ाज़ तो आया
हमारा क्या है जी लेंगे तुम्हारा नाम ले लेकर
ख़ुशी है कि तुम्हें जीने का एक अंदाज तो आया 
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है एकतरफा ही सही पर जां में जां आती है तब 
जब वो निकलते हैं अदा से रात में तफरीह को 
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लेना हो जितना ले लो तुम इम्तहान लेकिन
देख लो मुहब्बत में इतना गुरूर अच्छा नहीं 
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ज़िन्दगी लो आ खड़ी है फिर सुहाने मोड़ पर
फिर से दिल तकदीर की बाजीगरी से डर रहा 
मुहब्बत ना सही लेकिन करो नफरत ही खुलकर तुम
नहीं तो खाए जाता है हमारे बीच सन्नाटा....
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आज भी आवाज़ टकरा के लौट आई
आज फिर यकीन हुआ दिल नहीं वो पत्थर है
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जब देखो तब मेरी उल्फत पे शक
कहो तो ये दिल चीर कर अब दिखा दूं
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हाय उनका दिल - हाय उसका मौसम
मर गए इसके बदलने में हम....

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तू जो साथ है.....


तू जो साथ है दिन - रात है मेरी ज़िन्दगी सौगात है
तू जो एक पल को भी दूर हो हर बात फिर बेबात है

तू बसा है जबसे निगाह में लगे हर तरफ मुझे रौशनी
तू जो रूठ जाये अगर कभी तो फिर अश्कों की बरसात है

तू दिल हुआ धड़कन हुआ मेरी साँसों की थिरकन हुआ
तू जो है तो है ये वजूद अब नहीं बेवजह कायनात है

तू उतर चूका है लकीर में मेरी हाथों की कुछ इस कदर
तू जो मोड़ ले अब मुंह अगर लगे लुट चुकी ये हयात है

तू जुड़ा उड़ीं ख़बरें कई अजी लो गया अब तो 'विशाल'
तू हिला नहीं मेरे साथ से तो ख़बर में अपना ये साथ है

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Friday, February 10, 2012

है ये हाल आशिकी में....

दिल -
कमीना कहीं का
मेरा था कल तक
मेरे लिए धडकता था,
उनका हो गया है अब.....
सुकून -
था बहुत ज़िन्दगी में
उनसे मिलने से पहले, 
पर हाय रे इश्क का तूफ़ान
आया और उड़ा ले गया
पूरा का पूरा मेरी ज़िन्दगी से 
उनकी ज़िन्दगी की तरफ....
नींद -
आती थी बहुत जब देखो तब
जब आँखों में नहीं बसे थे
हमारे वो - उनके तमाम सपने,
आती है अब भी पर जगा देता है
उनसे जुड़ा कोई हसीन सा सपना....
मकसद -
था ज़िन्दगी का पहले 
ख़ास कामयाबी और तरक्की 
बेमिसाल इज्ज़त और शोहरत,
लेकिन अब है सिर्फ उनकी ख़ुशी
उनकी मुस्कराहट - उनकी चाहत
और इसी के सहारे जीना हमेशा
ज़िन्दगी का हर पल - हर लम्हा.....


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