Sunday, December 25, 2011

अटल जी के जी जन्मदिवस पर..........


हे काल पुरुष है नमन तुम्हें
इस जन्मदिवस के अवसर पर,
अरे आज तो कुछ बोलो मुख से
इस जन्मदिवस के अवसर पर....
राजनीति है दिशाहीन
चहुँ ओर व्याप्त अंधियारा है,
लोकपाल पर सब चकराए
हर दल इस पर हारा है....
नेतृत्व तुम्हारा स्मरण हो रहा
जब पक्ष - विपक्ष था नत - मस्तक,
सारे घटकों में थी एकता
एक तुम सत्ता में थे जब तक....
अमरीका रह गया देखता
भारत परमाणु शक्ति बन बैठा,
समस्त विश्व को बता दिया कि
देश आत्मनिर्भर हो बैठा....
कारगिल के बाद पाक को
सबसे अलग - थलग करवाया,
आतंकवाद का केंद्र यही है 
यह पूरे विश्व से मनवाया....
यदि रह जाते कुछ वर्ष और 
एक महाशक्ति होता ये देश,
कुछ क्षुद्र समस्याओं में ऐसे
कभी नहीं उलझता ये देश....
माना कि आयु हुई बाधक
और स्वास्थ्य भी साथ नहीं देता,
पर आप चुप रहे हर समस्या परसच, मानने का मन नहीं होता......

ईश्वर से आपके सुदीर्घ जीवन की
विशेष कामना के साथ 

Friday, December 09, 2011

ये मेरे कुछ शेर..........

उनके ग़म - उनकी यादों के अलावा भी है बहुत कुछ
क्या भूल गयी इतनी ज़ल्दी माँ की वो लोरियां.... ?
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शोला है तो भड़केगा हवा दें या कि पानी दें
जिन्हें जलना है जलते हैं बिना अंगारों के भी यार 
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तरीके और भी हैं यूं तुम्हारे पास रहने के
मगर डर है नज़र लग जाएगी हमारी इस मुहब्बत को
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तुम्हें मालूम क्या कि क्या बला हो तुम अदाओं में
खुदा भी खुद बनाकर जल गया होगा तुम्हें शायद 
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अजी क्या खूब है दावा मुहब्बत में निभाने का
चलो एक बार फिर से ओखली में सिर देके देखेंगे 
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आप यूं याद करते रहा न करें
हिचकियाँ हैं सताती हमें रात - दिन
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बात खूबसूरती से शुरू होती थी तब भी अब भी
पर सूरत से शुरू किस्सा सीरत पे ख़त्म होता है 
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यूं इस कदर तन्हाई अगर रास आ गयी
तो पहले कदम पर ही इश्क दम तोड़ जाएगा
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उनके लिए जब आँखें गंगोत्री हो चली
उम्मीद है कि एक दिन संगम भी आएगा
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खबर क्या थी यारों कि ये दिन भी होगा
अपने ही घर में बेगानों सी हालत........
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दौलत - ए - ग़म बहुत है सम्हालें कहाँ - कहाँ
अश्कों से भीगी ज़िन्दगी सुखाएं कहाँ - कहाँ 
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चलो कुछ काम तो आया मुहब्बत में फना होना
हमारे नाम का जलवा तुम्हारे शहर तक पहुंचा......
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मुहब्बत में ग़लतफ़हमी तो अक्सर हो ही जाती है
मगर जब दिल जुड़े हों तो बुरा कुछ भी नहीं होता 
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चलो अच्छा हुआ कि बच गए तुम ख़ाक होने से
नहीं तो तुम शहीद - ए - इश्क में भी नाम कर जाते
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ऐसा नहीं कि आपकी ज़रुरत नहीं रही
गैरों में रहके आपका ही नाम लिया है
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जरूरत क्या जुदाई की जब दिल में इतनी चाहत हो
जाओ आजमाओ पहले दिल और अपनी चाहत को
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लोगों को आस सावन की तो सहरा क्या दिखाना
उनकी तमाम उम्मीदों पे अब पानी क्या फिराना
माना तस्वीर पुरानी है पर दिल तो है नया - नया
ख़्वाबों का ये नया घरौंदा अब यूं भी क्या गिराना 

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Sunday, December 04, 2011

Its my tribute to DEV SAAHAB..............

जिसकी आँखें नहीं थी कोई मामूली आँखें
जिसकी मुस्कराहट नहीं थी कोई मामूली मुस्कराहट
जो करोड़ों दिलों की जैसे रहा हो ज़िन्दगी
वो दिल की वजह से गया ज़िन्दगी से
नहीं मानता दिल - नहीं मानता.....
जिसने ना जाने कितने ही सपने दिए
जिसने न जाने कितनी खुशियाँ बिखेरी
जो जैसे आशिकी की रहा हो एक किताब
वो हुआ बंद पन्नों में यूं इस तरह
नहीं मानता दिल - नहीं मानता.....
जिसने जो भी किया पूरे दिल से किया
जिसने कितनों को सबब जीने का दे दिया
रुपहले परदे की इतने सालों जो पहचान था
वो यूं कभी परदे के पीछे भी जाएगा
नहीं मानता दिल - नहीं मानता.....